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बजट को पक्ष ने सराहा तो विपक्ष ने ली चुटकी

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बादली। चुनावी साल में केंद्रीय वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा पेश किया गया केंद्रीय बजट राजनीतिक क्षेत्र में चर्चा का विषय बना है। सत्ताधारी नेता जहां बजट को जनहितैषी और डिजिटलाइजेशन के साथ किसान हितैषी बता रहे हैं, वहीं विपक्षी बजट पर चुटकी लेते हुए इसे केवल चुनावी स्टंट करार दे रहे हैं।
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हर वर्ग को महत्व दिया : रणवीर
भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी मास्टर रणवीर गुलिया का कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के साथ-साथ कृषि के क्षेत्र में भी यह एक बेहतर विजन पेश किया गया है। सरकार ने डिजिटलाइजेशन को मजबूत तरीके से बढ़ाने कामयाबी हासिल की है। बजट में सरकार ने हर वर्ग को विशेष महत्व दिया है। छोटे किसानों को वार्षिक प्रोत्साहन देना कारगर कदम है।

किसानों को लुभाने का प्रयास : अजय
जन नायक जनता पार्टी के प्रवक्ता अजय गुलिया का कहना है कि बजट सरकार की असफलता का नमूना है। किसानों को लुभाने का प्रयास किया गया है जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर केवल बयानबाजी सरकार ने की है। भूजल दोहन से सिंचाई की योजनाओं को अमलीजामा नहीं पहनाया गया। सरकारी कर्मचारियों को भी बजट में कुछ नया नहीं मिला है।
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उम्मीदों पर फेरा पानी : मामन
बादली से जिला पार्षद मामन ठेकेदार का कहना है कि कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल का बजट पूरी तरह से निराशाजनक है। कृषि क्षेत्र के उत्पादों पर कोई सब्सिडी की घोषणा नहीं की गई है। नदियों को आपस में जोडने की योजना के बारे में कुछ नहीं मिला। सरकारी कर्मचारी नाराज हुए है। सरकार ने केंद्रीय बजट के माध्यम से लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

शिक्षा के सुधार में नहीं उठाया कदम : कुलदीप
कांग्रेस नेता कुलदीप वत्स का कहना है कि स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। लोकसभा चुनाव को देखते हुए आम लोगों को सिर्फ झूठे सपने दिखाए गए हैं। युवाओं को रोजगार के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं करवाए गए। बजट के नाम पर लोगों के साथ धोखा किया गया है।

महंगाई पर नहीं लगाई रोक : गुलिया
एडवोकेट अरविंद गुलिया का कहना है कि आम आदमी को बजट में कुछ नया नहीं मिला। पेट्रोल और डीजल को सरकार जीएसटी के दायरे में नहीं ला सकी। सरकार ने निरंतर बढ़ रही महंगाई पर ब्रेक लगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। तेल और डीजल के भाव बढ़ाने की योजना भी बजट में तैयार की गई है।
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