बहादुरगढ़। नागरिक अस्पताल में गर्भवती महिला को चेकअप के बाद चिकित्सकों ने डिलिवरी के लिए 10 दिन की डेट दी। मगर अगले 21 घंटों बाद महिला ने ट्रामा सेंटर के गेट पर ई-रिक्शा में एक बच्ची को जन्म दे दिया। फिलहाल जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। इसमें अस्पताल की बड़ी लापरवाही सामने आई है। डिलिवरी के दौरान गर्भवती महिला की जान पर बन आई। आनन-फानन में स्टाफ और चिकित्सक उसे पहले तो ट्रामा सेंटर में ले गए। बाद में उसे लेबर रूम में भेजा गया। मामले में अस्पताल स्टाफ भी अपना बचाव करता नजर आ रहा है। प्रबंधन का तर्क है कि महिला की ओर से यदि एंबुलेंस के लिए फोन किया जाता तो उसे अस्पताल की तरफ से मदद की जाती।
टिकरी बार्डर पर स्थित हरिदास कॉलोनी में मो. रामुल शाह अपने परिवार के साथ रहता है। वीरवार को उसकी पत्नी नासरी खातून को पीड़ा हुई तो वह उसको लेकर नागरिक अस्पताल में जांच कराने के लिए पहुंचा। चिकित्सकों ने जांच करने के उपरांत 10 दिन बाद डिलीवरी होने की डेट दे दी। शुक्रवार की घनी सुबह करीब 4 बजे उसकी पत्नी को एक बार फिर पीड़ा होने लगी। पीड़ा होते देख उसकी मां समीना खातून पड़ोस में ही रहने वाली महिला के पास पहुंची और स्थिति बताई। उन्होंने महिला को तुरंत अस्पताल ले जाने की सलाह दी। वह नासरी खातून को लेकर साढ़े 4 बजे अस्पताल के लेबर रूम के पास पहुंचे। मो. रामुल ने आरोप लगाया है कि वे डेढ़ घंटे तक वहां बैठे रहे। मगर किसी भी चिकित्सक ने उन्हें देखने की जहमत नहीं उठाई और उसकी पत्नी दर्द से कराहती रही। उन्होंने कई बार चिकित्सकों से नासरी खातून को चेक करने की गुहार भी लगाई। उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं देने पर सवा छह बजे वे अपनी पत्नी को वापस घर ले गए। करीब ढाई घंटे बाद नासरी खातून को दोबारा से पीड़ा होने लगी। मो. रामुल की मां समीना खातून ई-रिक्शा से नासरी खातून को नागरिक अस्पताल में लेकर जा ही रहे थे। ट्रामा सेंटर के गेट के नजदीक पहुंचते ही नासरी खातून को तेजी से पीड़ा हुई और उसने एक कन्या को जन्म दिया। फिलहाल दोनों जच्चा-बच्चा स्वस्थ हैं और नागरिक अस्पताल में हैं।
शुक्र है भगवान का दोनों बच गए
मो. रामुल ने अस्पताल चिकित्सकों पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब उनकी पत्नी को किसी भी समय बच्चा हो सकता था तो चिकित्सकों ने वीरवार को ही यहां भर्ती क्यों नहीं किया। इसमें जांच करने वाले चिकित्सक की साफ-साफ लापरवाही सामने आती है। अब वे लगातार भगवान का शुक्र गुजार कर रहे हैं। अब मो. रामुल को तीन बेटियां हो गई हैं।
क्या कहता है अस्पताल प्रबंधन
अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. वीरेंद्र अहलावत का कहना है कि स्टाफ ने महिला को तुरंत संभाल लिया था और उनकी तरफ से यदि एंबुलेंस की सुविधा की मांग की जाती तो अस्पताल की ओर से हर संभव मदद की जाती। महिला व बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। उनकी हर तरह से देखरेख की जा रही है और यदि इस मामले में किसी की लापरवाही रही है तो उसकी जांच की जाएगी।