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बेनतीजा रही वार्ता, नहीं सुलझ पाया गुलिया खाप व रिलायंस के बीच उपजा विवाद

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अमर उजाला ब्यूरो।
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झज्जर।
बादली क्षेत्र में रिलायंस समूह द्वारा स्थापित मॉडल टाउन इकोनॉमिक टाउनशिप की जमीन पर कब्जा लिए जाने के मामले में क्षेत्र की गुलिया खाप और रिलायंस समूह के बीच आपसी सहमति नहीं बन पाई। झज्जर स्थित एक गार्डन में हुई बैठक में किसानों की तरफ गुलिया खाप के अध्यक्ष सुनील गुलिया, प्रशासन की ओर से बादली के उपमंडल अधिकारी त्रिलोकचंद और रिलायंस के कर्मचारी मौजूद रहे।
बता दें कि गुलिया खाप के लोगों ने पिछले दिनों गांव सौंधी में एक पंचायत का आयोजन कर क्षेत्र मॉडल टाउनशिप की जमीन से न सिर्फ रिलायंस समूह द्वारा लगाए गए साइन बोर्ड उखाड़ फेंके थे। बल्कि जमीन पर ट्रैक्टर चलाकर जमीन को समतल कर उस पर बिजाई करने का फैसला भी लिया था। इसी जमीन को लेकर बुधवार को रिलायंस समूह के अधिकारियों व गुलिया खाप के लोगों के बीच उनकी मांगों को लेकर आपसी सहमति बनाने के लिए झज्जर शहर की एक वाटिका में पंचायत का आयोजन किया गया। इसमें गुलिया खाप ने अपनी तीन मांगें रिलायंस समूह के अधिकारियों के सामने रखी थी।
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इन मांगों में रिलायंस द्वारा स्थापित मॉडल इकोनॉमिक टाउनशिप की जमीन पर अगले दो माह के भीतर इंडस्ट्रीज स्थापित करने,क्षेत्र के युवाओं को रोजगार देने व जिन किसानों की जमीन इस मॉडल इकोनॉमिक टाउनशिप में गई है। उन किसानों को जल्द से जल्द रायल्टी दिए जाने की मांग प्रमुख रूप से शामिल है। इन सभी मांगों को लेकर बैठक में पहुंचे रिलायंस समूह पदाधिकारियों में रोमेल राजायन, अमित दलाल, सोमबीर और अजय शुक्ला ने काफी देर तक मंथन भी किया और बाद में गुलिया खाप से इस बारे में दो माह का समय भी मांगा। लेकिन गुलिया खाप इस समय को बढ़ाने के लिए कतई तैयार नहीं हुई। बाद में गुलिया खाप के प्रधान सुनील गुलिया के नेतृत्व में खाप से जुड़े लोगों ने झज्जर डीसी से मिलकर वीरवार से ही गांव दादरी तोए में अगले 15 दिनों तक सांकेतिक धरना दिए जाने का फैसला किया। झज्जर में हुई इस बैठक को लेकर कई बार रिलायंस समूह के अधिकारियों से बातचीत करने का प्रयास किया गया। लेकिन बार-बार प्रयास करने के बावजूद भी उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
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ये था मामला
हुड्डा शासनकाल में झज्जर जिले के बादली क्षेत्र के किसानों ने रिलायंस समूह को एसईजेड स्थापित करने के उद्देश्य से जमीन दी थी। बादली क्षेत्र के इन किसानों की जमीन का सरकार ने अधिग्रहण नहीं किया था। बल्कि स्वयं किसानों ने ही अपनी खुशी से रिलायंस समूह को यह जमीन बाकायदा लाइन मेें लगकर बेची थी। बाद में जमीन को लेकर राजनीति शुरू हो गई और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपनी राजनीति चमकाने के लिए किसानों को इस बात के लिए उकसाना शुरू कर दिया। ताकि वह न सिर्फ रिलायंस समूह को बेची गई अपनी जमीन की रायल्टी मांगे। बल्कि यहां स्थापित होने वाले उद्योगों में अपने परिवार के युवाओं को रोजगार दिए जाने की मांग भी करे। बाद में यह दोनों ही बातें तत्कालीन हुड्डा सरकार ने मान ली थी। लेकिन बाद में रिलायंस समूह की एसईजेड स्थापित करने की योजना सिरे नही चढ़ पाई और उन्होंने इसका नाम बदलकर मॉडल टाउन इकोनॉमिक टाउनशिप रख दिया। विभिन्न प्रयासों के बावजूद भी अभी तक रिलायंस समूह अपनी इस मॉडल टाउन इकोनॉमिक टाउनशिप में सिर्फ दो-तीन कंपनियों को ही लाने में कामयाब हो पाई है। लेकिन अब किसान और खासकर गुलिया खाप के सब्र का पैमाना छलकना शुरू हो गया है और उन्होंने अपनी मांगें पूरी करवाने के लिए विरोध का रास्ता अपनाना शुरू कर दिया है। इसके लिए कई बार किसानों ने रिलायंस समूह की चिंहित की गई जमीन पर न सिर्फ ट्रैक्टर चलाए है, बल्कि उस पर कब्जा करने का भी प्रयास किया है।

- सहमति के लिए झज्जर में गुलिया खाप व रिलायंस के बीच हुई थी बैठक
- गुलिया खाप द्वारा रखी तीन मांगों में से किसी पर भी नहीं बन पाई सहमति
- अब गांव दादरी तोए में गुलिया खाप आज से शुरू करेगी सांकेतिक धरना
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