अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
दवा नियंत्रण विभाग की टीम ने वीरवार को लाइनपार क्षेत्र में छापमार कार्रवाई की। एक के बाद एक टीम ने 3 मेडिकल स्टोर पर दस्तक दी। यहां दवा का स्टाक और रिकार्ड खंगाला गया। दवाओं के सैंपल भी भरे गए। टीम की इस छापेमार कार्रवाई से मेडिकल स्टोर संचालकों में हड़कंप मच गया।
दरअसल, दवा नियंत्रण विभाग को लाइनपार के शंकर गार्डन स्थित एक मेडिकल स्टोर पर बिना लाइसेंस के दवा खरीदने बेचने की शिकायत मिली थी। इस पर विभाग की एक टीम ने वीरवार की दोपहर अचानक उक्त जयदुर्गा मेडिकल स्टोर पर दस्तक दी। ड्रग इंस्पेक्टर रजनीश धानीवाल की अगुवाई में टीम ने आते ही दवाओं का स्टॉक व रिकार्ड खंगाला। संचालक राजदेव से पूछताछ की। इस पर राजदेव ने दवाओं की खरीदने-बेचने की बात से इंकार कर दिया। राजदेव का कहना था कि दुकान दवाएं तो हैं, मगर खरीदी-बेची नहीं जाती। उसने लाइसेंस के लिए अप्लाई किया है। लाइसेंस मिलने के बाद ही काम शुरू करेगा। संचालक के बयान लेने के बाद टीम ने स्टोर में दवाओं की जांच की। छह दवाओं पर टीम को संशय हुआ तो उनके सैंपल भर लिए। फिर टीम संचालक को दवाएं न बेचने की चेतावनी देकर चली गई। इसके बाद टीम ने लाइनपार के ही विजय मेडिकल व एक अन्य मेडिकल स्टोर पर दस्तक दी। वहां से टीम ने दवाओं का रिकॉर्ड लिया और रिपोर्ट तैयार कर वापस झज्जर चली गई।
पहले भी हुई कार्रवाई
शंकर गार्डन स्थित उक्त मेडिकल स्टोर पर पहले भी दो बार छापमार कार्रवाई हो चुकी है। बताते हैं कि पहले यह स्टोर हरिदास मेडिकल स्टोर के नाम से था। कुछ दिनों पहले ही इसका नाम बदला गया है। इस पर टीम के अधिकारियों ने कहा कि यह भी जांच का विषय है। तमाम तथ्यों को एकत्र कर ही कार्रवाई की जाएगी। जांच में संचालक सही पाया जाता है तो उसे लाइसेंस दिया जाएगा अन्यथा कार्रवाई होगी।
व्यक्ति ने टीम पर उठाए सवाल
मौके पर मौजूद एक व्यक्ति ने टीम की कार्यशैली पर ही सवाल उठा दिए। उक्त व्यक्ति प्रदीप ने कहा कि स्टोर पर दवाएं बिक रही हैं या नहीं बिक रही यह जांच का विषय है, लेकिन जब तक जांच पूरी नहीं होती तब तक तो दवाओं की बिक्री पर रोक लगना चाहिए। यहां टीम बैठी थी, उसके सामने ही संचालक दवाएं बेच रहा था। ये हालात तब थे जब टीम को मालूम था कि उक्त संचालक के पास स्टोर चलाने के लिए लाइसेंस नहीं हैं।
अधिकारी बोले
ड्रग इंस्पेक्टर रजनीश ने कहा कि शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। जयदुर्गा मेडिकल से 6 से दवाओं के सैंपल लिए गए हैं। फिलहाल यहां जो भी मिला है, उसे निरीक्षण रिपोर्ट में लिख दिया गया है। यह रिपोर्ट और सैंपल वह अपने सीनियर अधिकारी को देंगे। रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि दवाएं असली है या नकली। अगला निरीक्षण वरिष्ठ टीम करेगी। लाइसेंस जारी न होने व जांच पूरी होने तब उक्त स्टोर पर दवाओं की बिक्री नहीं होगी। यदि ऐसा होता है तो सख्त कार्रवाई होगी।