झज्जर। शहर की सफाई, डोर-टू डोर कूड़ा उठान और लिफ्टिंग आदि व्यवस्था पर नगर परिषद करीब 3 करोड़ 84 लाख रुपये सालाना खर्च कर रही है। उसके बावजूद न तो शहर की सफाई ठीक से हो रही है और न ही कूड़ा उठान। यही वजह है कि स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 की रैंकिंग में झज्जर को पांचवीं रैंकिंग मिली जबकि वर्ष 2022 में यह रैंकिंग प्रदेश में एक नंबर पर थी। यानी चार रैंक का इस बार नुकसान हुआ है। इसकी वजह जानने के लिए शुक्रवार को चेयरमैन और पार्षदों ने शहर का दौरा किया तो हकीकत भी सामने आ गई। रेवाड़ी रोड पर डंपिग साइट पर कूड़ा छटाई की मशीने ही बंद मिली। ठेकेदार को नोटिस देने की बात चेयरमैन ने कही है।
शुक्रवार को खुद नगर परिषद के चेयरमैन जिले सिंह सैनी ने पार्षदों व उनके प्रतिनिधियों के साथ रेवाड़ी रोड पर डंपिंग साइट का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान यहां ठेकेदार ने मशीनें तो लगाई थी लेकिन वह बंद पड़ी थी। कूड़ा छंटाई का काम नहीं हो रहा था। ठेकेदार को पहले भी दो बार नोटिस दिए जा चुके हैं और अब फिर एक नोटिस दिया गया है। यहां बता दे कि डोर टू डोर, लिफ्टिंग व डंपिंग साइट से कूड़ा निष्पादन का मई तक टेंडर है और इस पर सालाना एक करोड़ 80 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। हर माह 15 लाख रुपये खर्च होते हैं। उसके बावजूद रैंकिंग गिरना गंभीर है। इस अवसर पर सचिव राकेश महत्ता, एमई मनदीप, पार्षद दिनेश छिकारा, पार्षद प्रतिनिधि जय सिंह आदि साथ थे।
पुरानी डंप साइट का किया निरीक्षण, टेंडर लगााया जाएगा
नगर परिषद चेयरमैन, पार्षद व प्रतिनिधियों ने उटलोदा गांव स्थित पुरानी डंपिंग साइट का भी निरीक्षण किया। यहां पर 25 से 30 हजार टन कूड़ा पड़ा था। इसकी सफाई व कूड़ा उठान को लेकर भी चेयरमैन ने ये बात कही। उन्होंने बताया कि कूड़े की छंटाई व उठान के लिए जल्द टेंडर लगाया जाएगा। इसमें प्लास्टिक सहित अन्य सामान को अलग-अलग कराया जाएगा। 16 जनवरी को होने वाली नप हाउस की बैठक में अब यह एजेंडा भी प्रमुखता से रखा जाएगा।
शहर की सफाई व्यवस्था में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। यदि कोई ठेकेदार काम ठीक नहीं करेगा तो उसका ठेका निरस्त करने की कार्रवाई कर दी जाएगी।
जिले सिंह सैनी, नप चेयरमैन