गोत्र विवाद : थाने में जुटे चार गांवों के ग्रामीण, पीड़ित में लगाई सुरक्षा की गुहार
दंपती ने कुछ दबंगों पर लगाया गोत्र को मुद्दा बनाकर गांव से सामाजिक बहिष्कार करने का आरोप, सदर पुलिस ने जांच की शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। एक गांव के बहुसंख्यक लोगों के गोत्र से संबंध रखनी वाली लड़की से शादी करने के मामले में सदर थाने में रविवार को खूब गहमागहमी हुई। 2016 में शादी होने के बाद इस मामले में कई पंचायतें हो चुकी हैं लेकिन कोई समाधान नहीं निकला है। गांव के कुछ लोग पीड़ित पक्ष के साथ हैं तो कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार शादी करने के लिए तीन गोत्र (लड़के, मां और दादी) छोड़ने आवश्यक है। इस मामले में लड़की का गोत्र तीनों से अलग है। कुछ लोगों को आपत्ति इस बात पर है कि लड़की की मां के गोत्र वाले लोगों की संख्या गांव में अधिक है। इस मामले में पीड़ित दंपती ने 14 जनवरी को सदर थाने में शिकायत दी थी। इस शिकायत में दंपती ने उनके शादी से खफा कुछ दबंगों पर सामाजिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं। सदर एसएचओ जगराम ने मामले की जांच के लिए रविवार सुबह दोनों पक्षों को थाने बुलाया था। उनके अलावा आसपास के तीन गांवों के ग्रामीण भी मामले का निपटारा कराने थाने पहुंचे थे। करीब डेढ़ घंटे तक पंचायत में समझौते के लिए सुझावों और उस पर दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाओं लेने का दौर चला। सहमति नहीं बनने पर सभी ग्रामीण थाने से लौट गए। वहीं, शिकायतकर्ता दिव्यांग युवक ने पुलिस से सुरक्षा और कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है। थाने पहुंचे शिकायतकर्ता युवक ने बताया कि वह कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर था। उक्त दबंगों को इसका पता था और उसे उनसे खतरा महसूस हुआ। इस समय वह दिल्ली में एक शिक्षण संस्थान में नौकरी कर रहा है।
मामले की जांच कर रहे सदर थाना प्रभारी जगराम ने रविवार सुबह दोनों पक्षों को थाने बुलाया। इस दौरान शिकायतकर्ता दंपती के गांव सहित समीपवर्ती तीन अन्य गांवों के ग्रामीण भी थाने पहुंचे। करीब 80-90 ग्रामीणों की मौजूदगी में सदर थाना परिसर में दोनों पक्षों ने पुलिस के सामने अपनी बात रखी। शिकायतकर्ता दंपती ने पुलिस शिकायत में सामाजिक बहिष्कार करने जैसे गंभीर आरोप भी कुछ ग्रामीणों पर लगाए। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसकी शादी दिसंबर 2016 में झज्जर जिले के एक गांव में हुई थी। उसकी पत्नी की मां का जो गोत्र है उसी गोत्र के काफी परिवार उनके गांव में भी है। उनकी शादी पर कुछ ग्रामीणों ने एतराज उठाया था। इस संबंध में कई बार पंचायतें भी हुईं जिनमें उक्त दबंगों ने सामाजिक प्रताड़ना जैसा फरमान भी सुनाया। शिकायतकर्ता ने बताया कि इन पंचायतों की रिकॉर्डिंग भी उसके पास है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाए कि उनके परिवार को किसी दुकानदार द्वारा सामान न देने का फरमान भी दबंगों ने जारी कर रखा है। पुलिस शिकायत में उसने बताया कि 13 जनवरी को भी गांव में पंचायत बुलाई गई थी। जब उसका भाई वहां पहुंचा तो उसे भगा दिया गया। अगले ही दिन उन्होंने इस मामले की शिकायत सदर पुलिस को दी। रविवार को दो घंटे चली पंचायत में दोनों पक्ष एकमत नहीं हो पाए और थाने से लौट गए।
कोट
मामले की जांच के लिए हमने दोनों पक्षों को थाने बुलाया था। दोनों से पूछताछ की गई और मामले की जांच अभी जारी है। प्रारंभिक पूछताछ में गांव से सामाजिक बहिष्कार जैसी बात नजर नहीं आई क्योंकि शिकायतकर्ता के पक्ष में भी काफी ग्रामीण हैं। कुछ ग्रामीणों के खिलाफ जो भी आरोप हैं पुलिस उनकी निष्पक्षता से जांच करेगी और दोनों पक्षों से आपसी सौहार्द और भाईचारा कायम रखने की अपील हमने की है। - जगराम, सदर थाना प्रभारी
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सदर थाने में आपसी सौहार्द बनाएरखने की अपील करता वक्ता।
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गहमागहमी होने पर खड़े होकर ग्रामीणों को समझाते एसएचओ जगराम।