अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत किसानों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इसका विषय फसलों में जीवाणु खाद का महत्व रहा। इसमें दादरी जिले के अलग-अलग गांवों के 60 किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि विजय वत्स ने शिरकत की। उन्होंने किसानों को बिक्री के गुर सिखकर अच्छा मुनाफा करने के लिए प्रेरित किया।
परियोजना के संयोजक डॉ. डीवी पाठक ने परियोजना के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की रूपरेखा के बारे में बताया। उन्होंने जीवाणु खादों का फसल उत्पादन में योगदान के बारे में बताया। इसके साथ-साथ फसलों और सब्जियों में काम आने वाले रासायनिक खादों व केमिकल के दुष्प्रभाव के बारे में बताया गया। कीट वैज्ञानिक डॉ. बलबीर सिंह ने कीट प्रबंधन के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कीट की उपस्थिति होने मात्र से ही कीटनाशकों का प्रयोग न करें। इसके लिए बीज उपचार, बीजाई के समय व संतुलित खादों के साथ जैविक कीटों द्वारा कीटों की संख्या कम कर सकते हैं। डॉ. आरएस दादरपाल ने खरपतवार नियंत्रण के बारे में और फसलों के उत्पादन तकनीक के बारे में विस्तार से बताया। डॉ. मुकेश कुमार (बागवनी विशेषज्ञ) ने बागों में जैविक खेती के महत्व व उपयोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने फलदार पौधों में देशी खाद (गोबर की खाद) के साथ-साथ जैविक खादों के उपयोग के फायदे व उससे गुणवत्ता में फायदे के बारे में बताया। डॉ. डीके शर्मा ने किसानों को बायोगैस लगाने, सोलर ऊर्जा के उपयोग व मशीनों के उपयोग से फसलों के अवशेषों व खादों को जल्दी सड़ने व प्रयोग में होने लायक बनाने के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने जैविक खेती के लिए कम समय में खाद बनाने व बड़े पैमाने पर खाद बनाने के तरीकों के बारे में बताया।डॉ. वीपी लुहाच ने हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय व कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा किसानों के हित में चलाई जा रही विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी दी।