अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
मुनि विश्वामित्र के साथ श्रीराम व लक्ष्मण का वन गमन करना व वहां संतों के धार्मिक अनुष्ठानों में विघ्न उत्पन्न कर रहे असुरों का समाप्त करना उनके शौर्य को तो दिखाता ही है। यह भी दर्शाता है कि सत्य व धर्म की रक्षा के लिए चाहे अल्प आयु हो हमेशा तत्पर रहना चाहिए। ये विचार साध्वी निष्ठानंद ने रविवार को पुराना शहर स्थित कीकरवासनी क्षेत्र स्थित बड़ा हनुमान मंदिर में हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान व्यक्त किए।
इस दौरान उन्होंने मुनि विश्वामित्र के संग श्रीराम व भ्राता लक्ष्मण के वन गमन का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि जब मुनि विश्वामित्र अयोध्या में महाराजा दशरथ के पास आसुरी शक्तियों को समाप्त करने व राम लक्ष्मण को अपने साथ वन गमन के लिए लेकर आए तो श्रीराम की किशोर अवस्था के चलते दशरथ स्वाभाविक रूप से चिंतित थे लेकिन आज्ञाकारी श्रीराम वनवास गए ।साध्वी ने कहा कि हमें श्रीराम के जीवन आदर्श से प्रेरणा लेनी चाहिए व सामाजिक बुराइयों को दूर करना चाहिए।इस अवसर पर अधिवक्ता जीतराम , अधिवक्ता सुरेश वशिष्ठ, अधिवक्ता श्रीभगवान, प्रहलाद, प्रेमप्रकाश जांगड़ा, भागेश्वर निर्मल, राकेश अरोड़ा, सुंदरलाल, पंडित होशियार सिंह आदि श्रद्धालु उपस्थित थे।