इनेलो और भाजपा से नजदीकियों के बाद अब कांग्रेस के बागी सांसद राव
इंद्रजीत सिंह ने खुद के इंसाफ मंच के विस्तार की घोषणा कर दी है।
इससे
अब यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि वे किसी भी दल में शामिल होने की बजाय
अपने ही संगठन इंसाफ मंच को आगे बढ़ाएंगे और इसी नैय्या में चुनावी समर में
उतरेंगे। हालांकि इस संगठन के किसी गठबंधन में शामिल होने से इंकार नहीं
किया जा सकता। हालांकि इनेलो के वरिष्ठ नेता अभय चौटाला अकेले चुनाव लड़ने
के संकेत दे चुके हैं। वहीं, भाजपा-हजकां गठबंधन पहले ही हो चुका है।
सीएम
भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर विकास में भेदभाव का आरोप लगाने वाले गुड़गांव के
सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने कांग्रेस में भूचाल मचा रखा है। पटौदी में 3
मार्च को उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व को नौकरी और विकास के मामले
में भेदभाव करने पर बेनकाब करने का दावा किया था। उन्होंने कांग्रेस
अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा पर भी जमीन विवाद में निशाना
साधा था। इसके बाद राव ने 23 सितंबर को रेवाड़ी में शहीदी दिवस पर आयोजित
विशाल रैली में कांग्रेस के टिकट से चुनाव न लड़ने का ऐलान कर अपनी पार्टी
से विदाई के संकेत दे दिए थे।
इसके बाद से ही यह कयास लगाए जाने
लगे थे कि वे भाजपा से हाथ मिलाएंगे। भाजपा के कई केंद्रीय नेता भी उनके
संपर्क में थे। वहीं, एक नवंबर को उन्होंने कुरुक्षेत्र में चौ. देवीलाल के
जन्मदिवस पर आयोजित इनेलो की सम्मान रैली में भी शिरकत की। हालांकि राव ने
इनेलो की हरी पगड़ी स्वीकार नहीं की, लेकिन उनके इनेलो में शामिल होने के
चर्चे खूब हुए। इस पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष फूलचंद मुलाना ने उनकी शिकायत
पार्टी आलाकमान को भी की।
इसकी परवाह न करते हुए राव इंद्रजीत ने
शनिवार को अपने संगठन इंसाफ मंच को मजबूती देते हुए उसके विस्तार की घोषणा
कर दी। राव ने अभी इंसाफ मंच के 12 जिलों के जिला अध्यक्षों के नाम की घोषण
की है। राजनेताओं की निगाह अब राव के अगले कदम पर टिकी है कि वह झज्जर में
कब रैली करते हैं और रैली में कौन-कौन राजनेता शामिल होते हैं।