एवरेस्ट विजेता टोहाना निवासी रामलाल शर्मा ने सरकार की अनदेखी से परेशान
होकर अब दिल्ली में जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल की चेतावनी दी है।
रामलाल
लोगों के सहयोग और कर्ज लेकर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर इस आस में चढ़ा
था कि प्रदेश सरकार अन्य पर्वतारोहियों की तरह उसकी प्रतिभा का भी सम्मान
करेगी। अब उपलब्धि हासिल करने के सात माह बीत जाने के बावजूद उसे न तो
घोषित नकद राशि मिली है और न ही सरकारी नौकरी। वहीं, बीएससी पास रामलाल
लोगों का कर्ज उतारने के लिए रेहड़ी लगाने को मजबूर है।
एक गरीब
परिवार में जन्मे रामलाल शर्मा ने अपने जुनून और प्रतिभा के दम पर 21 मई
2013 को एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया था। इसके बाद रोहतक में उसका सम्मान
समारोह किया गया, जिसमें हरियाणा सरकार की ओर से उसे पांच लाख रुपये देने
की घोषणा की गई, लेकिन अभी तक यह राशि नहीं मिली है। वह कई बार मंत्रियों
के सामने अपील कर चुका है, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। एक गरीब परिवार में
जन्मे रामलाल शर्मा ने कहा कि अगर सरकार की ओर से उसे नौकरी नहीं दी गई तो
वह दिल्ली में जाकर जंतर मंतर पर भूख हड़ताल करेगा।
ममता सौदा से मिली प्रेरणा
कैथल
निवासी माउंट एवरेस्ट पर विजय पाने वाली डीएसपी ममता सौदा से मुलाकात के
बाद रामलाल ने भी पर्वतारोहण का जज्बा पाला था। इससे पहले वह शूटिंग में
नेशनल और बॉक्सिंग में प्रदेश स्तर पर लोहा मनवा चुका है। मगर एवरेस्ट की
राह में उसकी गरीबी आड़े आई। उसके पिता भी रेहड़ी लगाकर परिवार का खर्च
चलाते थे, लेकिन अब वह भी बीमार हैं।
समाजसेवियों के चंदे से गया था अभियान में
रामलाल
टोहाना के बजरंग पब्लिक स्कूल का विद्यार्थी रहा है। उसके गुरु विनय वर्मा
ने जब उसकी प्रतिभा को देखा तो मदद के लिए आगे आए। स्कूल संचालक विनय
वर्मा ने समाजसेवियों से मदद की अपील की और इस तरह रामलाल के लिए 22 लाख की
राशि एकत्रित हो गई। रामलाल को अभियान में जाने के लिए 25 लाख की जरूरत
थी। इसलिए उसने 3 लाख रुपये का कर्ज लिया, लेकिन अब वह इस कर्ज की ऊंचाई पर
विजय प्राप्त नहीं कर सका है।