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Hisar News: विश्व दुग्ध दिवस....हरियाणवियों की सेहत के साथ अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रहा दूध

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हिसार। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है। वैश्विक दूध उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है। वर्ष 2024-25 में देश का कुल दूध उत्पादन 247.87 मिलियन मीट्रिक टन दर्ज किया गया। इसके बावजूद उत्पादन से उपभोक्ता तक पहुंचने की प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में दूध खराब हो जाता है।
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विशेषज्ञों के अनुसार देश में उत्पादित करीब 5 प्रतिशत दूध उपभोग से पहले ही खराब हो जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर यह मात्रा लगभग 1.2 करोड़ टन प्रतिवर्ष है। इसकी कीमत करीब 84 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है। इस नुकसान को कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें दुग्ध शीतकरण (चिलिंग) व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रही हैं। गांवों और दुग्ध संग्रहण केंद्रों के पास नए चिलिंग प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं जबकि बेहतर सड़क नेटवर्क, एक्सप्रेस-वे और तेज परिवहन सुविधाओं के माध्यम से दूध को कम समय में शीतकरण केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। देश में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दूध उपलब्धता 485 ग्राम है जबकि हरियाणा में यह आंकड़ा 1,128 ग्राम प्रतिदिन है। यह राष्ट्रीय औसत से दोगुने से भी अधिक है। यही कारण है कि हरियाणा को लंबे समय से दूध, दही और घी की समृद्ध परंपरा वाला प्रदेश माना जाता है। देश में दूध उत्पादन के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल उत्पादन में लगभग 43 प्रतिशत हिस्सेदारी भैंस के दूध की है। इसके अलावा 30 प्रतिशत दूध संकर नस्ल की गायों, 21 प्रतिशत देशी गायों और लगभग 3.3 प्रतिशत बकरियों से प्राप्त होता है। हरियाणा की विशेषता यह है कि यहां कुल दुग्ध उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा भैंसों से प्राप्त होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हरियाणा में उच्च दुग्ध उत्पादन न केवल लोगों के पोषण स्तर को बेहतर बनाता है बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करता है। प्रदेश में कृषि के साथ-साथ पशुपालन किसानों की आय का प्रमुख स्रोत बना हुआ है। यही वजह है कि देसां में देस हरियाणा, जित दूध-दही का खाना कहावत आज भी प्रासंगिक है।
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दूध को खराब होने से ऐसे बचाएं
- दूध निकालने के तीन घंटे के भीतर उसे शीतकरण या पाश्चुरीकरण की प्रक्रिया में लाया जाए। इसके लिए गांव स्तर पर चिलिंग प्वाइंट स्थापित किए जाएं।
- पशुओं और पशुपालकों के स्वास्थ्य की छह माह से एक वर्ष के अंतराल पर नियमित जांच करानी चाहिए।
- दूध निकालने से कुछ समय पहले पशु को खड़ा कर लें, इससे थनों के आसपास मौजूद बैक्टीरिया की संख्या कम होती है।
- दूध निकालने से पहले थनों और उनके आसपास के हिस्से को गुनगुने पानी से अच्छी तरह साफ करें।
- दूध निकालने के बाद कुछ समय तक पशु को बैठने न दें क्योंकि उस समय थनों के छिद्र खुले रहते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
- दूध निकालने से पहले पशुपालक अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं।
- दूध निकालने में प्रयोग होने वाले बर्तनों को गर्म पानी और साबुन से अच्छी तरह साफ करें।
- पशुओं के बैठने का स्थान गोबर, कीचड़ और गंदगी से मुक्त होना चाहिए।
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देश में सबसे अधिक दूध उत्पादन करने वाले शीर्ष 10 राज्य
राज्य
हिस्सेदारी
उत्तर प्रदेश
15.66%
राजस्थान
14.82%
मध्य प्रदेश
9.12%
गुजरात
7.78%
महाराष्ट्र
6.71%
पंजाब
6.00%
आंध्र प्रदेश
5.63%
कर्नाटक
5.61%
बिहार
5.41%
हरियाणा 5.08%
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प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता में हरियाणा तीसरे स्थान पर
वर्ष 2025 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 1,318 ग्राम दूध उपलब्धता के साथ पंजाब देश में पहले स्थान पर है। राजस्थान 1,229 ग्राम प्रति व्यक्ति उपलब्धता के साथ दूसरे स्थान पर जबकि हरियाणा 1,128 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दूध उपलब्धता के साथ तीसरे स्थान पर है। सर्वाधिक दूध उत्पादन करने वाला उत्तर प्रदेश प्रति व्यक्ति उपलब्धता के मामले में शीर्ष दस में अंतिम स्थान पर है।
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राष्ट्रीय स्तर पर दूध उत्पादन 5 से 6 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। छोटा प्रदेश होने के बावजूद हरियाणा दूध उत्पादन में देश में दसवें स्थान पर है। प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता के मामले में हम देश में तीसरे स्थान पर हैं। हरियाणा की मजबूत अर्थव्यवस्था में दूध उत्पादन का महत्वपूर्ण योगदान है। कृषि के साथ पशुपालन किसानों की आय बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। - डॉ. अशोक मलिक, वरिष्ठ वैज्ञानिक, लुवास
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