हिसार। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एचएसआरएलएम) ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को कृषि क्षेत्र में नई भूमिका देने की पहल की है। इसके तहत महिलाओं को किसान सहायक दीदी के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
प्रशिक्षित महिलाएं गांव-गांव जाकर खेतों से मिट्टी के नमूने एकत्र करेंगी। मृदा परीक्षण के आधार पर किसानों को खेती से जुड़ी वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराने में सहयोग करेंगी।
यह प्रशिक्षण कृषि विभाग के तकनीकी सहायक डॉ. राजीव भाटिया और एसटीओ हांसी डॉ. सतबीर सिंह ने दिया। पहल उपायुक्त हिसार महेंद्र पाल के मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य किसानों को भूमि की उर्वरता के अनुसार उचित सलाह देना है। साथ ही संतुलित मात्रा में उर्वरकों के इस्तेमाल के प्रति जागरूक करना है।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड से मिलेगी सही जानकारी
जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र ने बताया कि प्रशिक्षित किसान सहायक दीदी खेतों से मिट्टी के नमूने लेंगी। परीक्षण के बाद तैयार मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर किसानों को जरूरी कृषि परामर्श उपलब्ध कराने में सहयोग किया जाएगा। मृदा जांच से खेत में मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति का पता चलेगा। किसान जरूरत के अनुसार ही खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल कर सकेंगे।
खेती की लागत घटाने में मिलेगी मदद
मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल होने से किसानों की अनावश्यक खाद पर होने वाली लागत कम होगी। इससे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। उचित पोषक तत्व मिलने से फसल उत्पादन बढ़ाने की संभावना रहेगी। लंबे समय में यह व्यवस्था किसानों को आर्थिक लाभ देने के साथ टिकाऊ खेती को बढ़ावा देगी।
महिलाओं के लिए खुलेंगे आय के नए रास्ते
जिला कार्यक्रम अधिकारी वीरेंद्र कुमार ने बताया कि पहल से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को रोजगार और आय के नए अवसर मिलेंगे। वे कृषि विभाग और किसानों के बीच स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण कड़ी बनेंगी।
गांव में मृदा परीक्षण की सुविधा मिलने से किसानों को भी इसका सीधा लाभ होगा। जिला प्रशासन और एचएसआरएलएम की यह पहल महिला सशक्तीकरण के साथ वैज्ञानिक और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को मजबूत करने में सहायक होगी।