बालसमंद। डिजिटल इंडिया के तहत गांवों और शहरों में बनाए गए वाई-फाई चौपाल सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। पिछले कई महीनों से प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बीबीएनएल द्वारा दी जा रही सुविधा वाईफाई चौपाल की सेवा बंद पड़ी है। करीब दो साल पहले जिले के हर गांव को वाई-फाई की सुविधा देने के लिए लाखों रुपये की लागत से लगाए गए उपकरण आज धूल फांक रहे हैं। गांवों के सीएससी संचालकों को महंगे रेट पर प्राइवेट वाई-फाई लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
सीएससी संचालक राकेश, प्रमोद, सुनील, रवि कुमार, संदीप ने बताया कि शुरुआत में बताया गया कि वाई-फाई चौपाल में 100 एमबीपीएस की स्पीड मिलेगी, लेकिन स्पीड तो दूर जो काम करने के लिए उन्हें स्पीड चाहिए वो भी नहीं मिल पाई। वीएलई की मांग है कि वाई फाई चौपाल को फिर से शुरू किया जाए ताकि उन्हें हो रहे नुकसान से छुटकारा मिल सके।
पांच सरकारी संस्थानों में उपलब्ध कराए गए थे कनेक्शन
वाईफाई चौपाल प्रोजेक्ट के तहत प्रत्येक गांव में 5 सरकारी संस्थानों पर निशुल्क इंटरनेट कनेक्शन इस योजना के तहत दिए गए थे। जैसे ग्राम पंचायत, सरकारी स्कूल, अस्पताल, पशु अस्पताल या गांव में कोई भी सरकारी भवन इनमें योजना के तहत अनलिमिटेड इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध करवाई जानी थी।
बीबीएनएल कंपनी का बीएसएनल में विलय हो चुका है। बीबीएनएल और सीएससी का एग्रीमेंट समाप्त हो चुका है। जून में प्रोजेक्ट सुचारू हो सकता है। - विकास वर्मा, डीएम, सीएससी हिसार