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Hisar News: शाबाश दिलबाग... जज्बे से जीत लिया सोना, थाइलैंड में 17.57 सेकंड में पूरी की 100 मीटर दौड़

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थाईलैंड में सोना जीतकर पहुंचे कालवास के ब्लेड  रनर दिलबाग का निकाला विजयी जुलूस। 
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हिसार। दिव्यांगता को कमजोरी न मानकर फौलादी हौसले के दम पर गांव कालवास के ब्लेड रनर दिलबाग ने थाइलैंड के नाखोन रत्चासिमा में आयोजित वर्ल्ड एबिलिटीस्पोर्ट यूथ गेम्स में 17.57 सेकंड में 100 मीटर दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक हासिल किया है। एक दिसंबर से 7 दिसंबर तक आयोजित इन खेलों में दिलबाग ने टी-63 कैटेगरी में प्रतिभाग किया।
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प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर लौटे दिलबाग ने बताया कि अब उनका लक्ष्य पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है। पहली बार उन्होंने अंतरराष्ट्रीय गेम्स में हिस्सा लिया है और स्वर्ण पदक हासिल कर लिया। दिलबाग को पदक देकर और साफा पहनाकर सम्मानित किया गया। उपलब्धि का सर्टिफिकेट ऑनलाइन मिलेगा। पदक जीतने पर दिलबाग के परिवार में खुशी का माहौल है। घर पर बधाइयाें का तांता लगा हुआ है। माता-पिता खुशी से फुले नहीं समा रहे हैं। रविवार को गांव पहुंचा तो विजयी जुलूस निकाला गया और ग्रामीणों ने नोटाें की माला पहनाई। जगह-जगह स्वागत किया। दिलबाग ने बताया कि वह मंगलवार से फिर एचएयू के गिरी सेंटर में खिलाड़ी भूपेंद्र बामल के पास 100 मीटर रेस और लंबी कूद का अभ्यास शुरू करेंगे।
खेत जाते समय हुआ था हादसा
दिलबाग बताते हैं कि साढ़े पांच साल की उम्र में उनके साथ सड़क हादसा हुआ था। ताऊ की बेटी रिंकू के साथ खेत में बनी ढाणी से अपने गांव कालवास में पैदल ही आ रहे थे। इसी दौरान पीछे से आ रहे वाहन ने चपेट में ले लिया। हादसे में उनकी एक टांग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जिसे काटनी पड़ी। मगर हौसला नहीं तोड़ा और मैदान में उतर गया। पिछले चार साल से गिरी सेंटर में अभ्यास कर रहा हूं।
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अमर उजाला ने प्रकाशित की थी दिलबाग के जज्बे की कहानी
अमर उजाला ने 16 नवंबर के अंक में दिलबाग के जज्बे और संघर्ष की कहानी प्रकाशित की थी। इस दौरान उन्होंने पहले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में प्रतिभाग कर पदक जीतने का वादा जिलेवासियों से किया था।
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बेटे की मेहनत रंग लाई
बेटे ने स्वर्ण पदक जीतकर गांव और देश का नाम रोशन किया है। इससे बड़ी खुशी मेरे लिए कोई नहीं है। वर्ल्ड एबिलिटीस्पोर्ट यूथ गेम्स के लिए बेटे ने कड़ी मेहनत की। रोजाना सात से आठ घंटे पसीना बहाया। आखिरकार मेहनत रंग लाई।
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- लीलूराम, दिलबाग के पिता
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