वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण रविवार को जिले में 4.6 एमएम बारिश दर्ज की गई है। इससे फसलों को बेहद फायदा हुआ है। जनवरी महीने में पांचवीं बार बूंदाबांदी हुई है। जो फसलों के लिए सोने पर सुहागे का काम करेगी। इससे फसलों में सिंचाई की पूर्ति हो रही है। लगातार हो रही इस बूंदाबांदी से गेहूं व सरसों का उत्पादन पिछली बार की अपेक्षा बढ़ने की पूरी संभावना है। पिछली बार करीब 46 मन प्रति एकड़ गेहूं की औसत जिले में रही थी। जिले में करीब 90 प्रतिशत भाग यानी करीब 2 लाख 25 हजार हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की फसल है। इसमें अभी तक कोई भी समस्या नहीं आई है। मौसम फसल के अनुरूप सही चल रहा है। बरसात से पाला पड़ने की आशंका अब खत्म हो गई है। रविवार को अधिकतम तापमान 19 और न्यूनतम तापमन 10.5 दर्ज किया। बरसात से सर्दी कम हुई है। अगले दो दिन में भी बरसात की संभावना जताई गई है।
सिंचाई की हो रही पूर्ति
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार गेहूं की फसल को औसतन 80 दिन हो गए हैं, जिसके कारण चौथे पानी की जरूरत है। रविवार को हुई बूंदाबांदी से इस सिंचाई की पूर्ति कुछ हद तक पूरी हुई है। जहां गेहूं में केवल दो ही पानी उपलब्ध होते हैं। पानी की कमी वाले इलाकों में बूंदाबांदी का सबसे अधिक फायदा होगा। इससे गेहूं के दाने पर असर पड़ेगा और उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।
सरसों में फलियां बन चुकी
जिले में 70 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में सरसों की बुआई की हुई है। जिले में अगेती बुआई के कारण फलियां भी आ गई हैं। बूंदाबांदी से कोई नुकसान वाली बात नहीं है। वहीं यह बूंदाबांदी हरे चारे के लिए भी बेहद फायदेमंद होगी और हरे चारे का उत्पादन बढ़ेगा।
बूंदाबांदी सभी फसलों के लिए बेहद फायदेमंद है। गेहूं के लिए इसे सोने पर सुहागा कहा जा सकता है। इससे गेहूं की बालियां अच्छी होने के साथ बढ़वार भी होगी।
- डॉ. प्रवीण मंडल, कृषि विशेषज्ञ, कृषि विभाग हिसार