नारनौंद। गांव गुराना की बंद गलियों और शहीदी चौकों पर कथित कब्जों का मामला तीन महीने बाद भी समाधान की बाट जोह रहा है। कार्रवाई न होने से नाराज ग्रामीणों ने कहा कि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वह दोबारा डीसी हांसी से मिलकर शिकायत करेंगे। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट का रुख करने की चेतावनी दी है।
ग्रामीणों ने सरकारी रास्तों और चौकों की पैमाइश कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने तथा अतिक्रमण मिलने पर उसे हटाने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार, 6 जुलाई को जिला उपायुक्त हांसी के समाधान शिविर में ग्राम पंचायत गुराना ने एसडीएम हांसी के समक्ष समस्या रखी थी।
एसडीएम ने पंचायत विभाग को गलियों और चौकों की पैमाइश करवाकर कब्जे हटाने के निर्देश दिए थे। पंचायत की ओर से पैमाइश का प्रस्ताव पास कर कार्रवाई के लिए बीडीओ बरवाला को भेजा गया लेकिन करीब 60 दिन बाद भी मौके पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीण जिले सिंह, बलराज उर्फ महालड़, रिसाला, करतारा, शिशपाल, धीरा, राजद, राममेहर, सुभाष शर्मा, धर्मपाल, साधू, दीप सिंह और रामफल सहित अन्य ने बताया कि पैमाइश का पूरा खर्च ग्राम पंचायत की ओर से वहन करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामीणों ने बीडीओ बरवाला से आरटीआई के माध्यम से मामले में हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी।
ग्रामीणों का आरोप है कि आरटीआई में पूछे गए सवालों की अपेक्षित जानकारी भी नहीं दी गई। दस्तावेज में बीडीओ कार्यालय की ओर से आवेदन वापस किए जाने का उल्लेख है।
30 फीट चौड़ी गलियां 8-10 फीट बचीं
ग्रामीणों का कहना है कि डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक से नेताजी सुभाष चंद्र बोस चौक और शहीद भगत सिंह चौक तक जाने वाली गलियां पहले करीब 30 फीट चौड़ी थीं लेकिन कुछ स्थानों पर इनकी चौड़ाई घटकर 8 से 10 फीट रह गई है। इससे आवागमन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने शहीदी चौकों की निर्धारित जमीन पर भी कब्जे होने का आरोप लगाया है।