गांव बहबलपुर में एक साढ़े नौ साल की बच्ची के साथ दुराचार के प्रयास की शिकायत देने थाने आए परिजनों को ही पुलिस ने जमकर पीटा। पीड़ित बच्ची की मां, पिता, चाचा और मामा पर पुलिस का कहर टूटा। बाद में इतने गंभीर मामले में पुलिस ने थाने में पंचायत करवाकर दोनों पक्षों में समझौता करवा दिया। यानी मासूम बच्ची पर जो कहर टूटा और पुलिस ने जो बर्बरता दिखाई, उस सब मामले को बड़ी सफाई से दबा दिया गया।
पीड़ित बच्ची के पिता व चाचा ने बताया कि मंगलवार को उसकी बेटी घर पर झूला झूल रही थी। पड़ोस का एक 17 वर्षीय किशोर उसे बहला फुसला कर अपने साथ गांव के नजदीक ही बाजरे के खेत में ले गया। खेत में जाकर किशोर ने बच्ची के साथ दुराचार का प्रयास किया। यह सब खेत में काम कर रही एक गांव की अन्य महिला ने देख लिया। मामले के बारे में उन्होंने बच्ची के परिजनों को बता दिया। परिजनों ने जब बच्ची से पूछा तो बच्ची सहमी हुई थी। आरोप है कि किशोर ने उसे जान से मारने की धमकी दी। परिजनों ने मंगलवार रात को ही पुलिस को शिकायत दे दी। पुलिस सूचना मिलते ही महिला पुलिस कर्मी के साथ मौके पर पहुंची और खेत में जाकर भी वारदात स्थल को देखा। पूरा मामला जानने के बाद पुलिस ने पीड़ितों को बुधवार सुबह लिखित शिकायत देने के लिए बुला लिया। वहीं, बुधवार शाम साढ़े चार बजे पुलिस ने दोनों पक्षों में समझौता होने की बात मीडिया कर्मियों को बताई।
हमारी फूल सी बच्ची के साथ दुराचार का प्रयास हुआ। हमने मंगलवार रात को पुलिस को शिकायत दे दी थी। पुलिस मौके पर भी पहुंची। घटनास्थल पर भी गई, खेत में बाजरे के पौधे टूटे हुए थे। पुलिस ने घटनास्थल की फोटो भी ली। पिता बोले उनसे रात को पुलिस ने यह लिखवा लिया कि अंधेरा हो जाने के चलते हम सुबह कार्रवाई चाहते हैं। परिजनों ने यह सब लिखकर दे दिया।
बुधवार सुबह पुलिस ने उन्हें थाने बुलाया। सबसे पहले समझौते की बात हुई। समाज का दबाव आया तो उन्होंने हां कही। किशोर को घर से पुलिस उठाकर ले आई। पिता ने जैसा ही कहा कि उनके सामने पुलिस ने किशोर को जूते मारने की बात कही। मौके पर पीड़ित बच्ची का पिता, चाचा, मां व मामा थे।
एक पुलिस कर्मचारी पट्टा लेकर आया उसने किशोर को फर्श पर लेटा लिया और दो पट्टे मार दिए। पट्टे मारने के बाद उसने बच्ची के पिता से माफी मांगने की बात कही। किशोर झुक गया। पीछे से महिला पुलिस कर्मचारी ने लात मारी। किशोर बच्ची के पिता के पांवों में जा गिरा।
पांव पर गिरते ही बच्ची के पिता ने उसे वापस पांव से ही धक्का दे दिया। आरोप है कि ऐसा करते ही जो पुलिस कर्मचारी किशोर को पीट रहा था वह बच्ची के पिता को पीटने लग गया। अचानक पुलिस के रवैये पर पास खड़े बच्ची के चाचा, मामा व मां ने उसे छुड़वाने की कोशिश की। पुलिस कर्मचारियों ने उन्हें भी पीटना शुरू कर दिया। पीड़ित परिवार का कहना है कि जिस युवक ने बच्ची के साथ रेप की कोशिश की उसके लिए कहा कि इसे बाहर ले जाओ और चाय पानी पिलाओ। उन्हें कहा गया कि समझौता कर लो, नहीं तो बच्ची को काटने पड़ेंगे थाने के चक्कर।
पुलिस को बच्ची व लड़के के झगड़े की सूचना मिली थी। पुलिस मौके पर भी गई। दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर पूरा मामला पूछा। जिन्होंने आपस में समझौता करने की बात कहकर लिखित में थाने में राजीनामा दिया है। शिकायतकर्ता व उसके परिजनों के साथ मारपीट करने की कोई ऐसी बात नहीं। आरोप तो कोई कुछ भी लगा सकता है।- - ईश्वर सिंह, सब इंस्पेक्टर, सदर थाना
लड़की के पिता ने आरोपी किशोर के साथ थाने में मारपीट कर दी थी। गुस्से में मैंने उसे धमकाया था। उसके लिए मैंने कान पकड़कर माफी भी मांग ली है।- - रमेश, एएसआई, सदर थाना
नॉन कंपाउंडेबल ऑफेंस में किसी हालात में समझौता नहीं करवाया जा सकता। कोर्ट भी ऐसे मामलों में समझौते नहीं करवाती। पुलिस को ऐसे किसी मामले में समझौता करवाने का अधिकार ही नहीं है। कानूनी रूप में अगर पुलिस के सामने नॉन कंपाउंडेबल ऑफेंस (गैर समझौता अपराध) आए तो उन्हें मुकदमा दर्ज करना होता है। पुलिस ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता की जो पहली एप्लीकेशन आई थी, उसी पर केस दर्ज कर सकती है। पुलिस के पास ऐसी पावर कतई नहीं है कि उसकी संज्ञान में आए मामले में वह समझौता करवा दे।- लाल बहादुर खोवाल, वरिष्ठ अधिवक्ता।