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म्हारी छोरी ललिता ने कॉमनवेल्थ में जीती चांदी

Thu, 31 Jul 2014 12:01 AM IST
अमित भारद्वाज, हिसार
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शहर की कुश्ती खिलाड़ी ललिता सहरावत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में वे नाइजीरिया की खिलाड़ी ओ एडीकयूरोए से हार गई। फाइनल मुकाबले से पहले ललिता ने साउथ अफ्रीका और स्कॉटलैंड की खिलाड़ी को हराया। हालांकि उनके परिवार को गोल्ड न मिलने का मलाल है, लेकिन रजत पदक जीतने से भी यहां पर खुशी का माहौल है। 
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 बुधवार को ललिता का मैच होने के चलते सभी परिवार वाले टीवी के सामने बैठ गए थे। जवाहर नगर गली नंबर सात स्थित ललिता के घर आसपड़ोस के लोग भी बड़ी संख्या में पहुंच गए। तीन पीढ़ियों ने एक साथ मैच देखना शुरू किया। मैच शुरू होती ही तालियां बजाकर स्वागत किया गया। सभी सदस्यों की आंखें टीवी की स्क्रीन पर टिक गई। नाइजीरिया की खिलाड़ी ने ललिता को पैरों में फंसाने का दांव लगाते हुए पराजित कर दिया। पराजय के बाद परिजनों को थोड़ी मायूसी तो हुई, लेकिन सिल्वर मेडल जीतने की खुशी मनाई। मैच जीतने के बाद ललिता के घर के बाहर ढोल नगाड़े बजाए गए। पटाखे चलाकर खुशी का इजहार किया किया गया।

ललिता के पिता जोगेंद्र सहरावत ने कहा कि बेटी से गोल्ड की उम्मीद थी। चलो सिल्वर मेडल भी अच्छी एचीवमेंट है। अब ललिता को एशियन व ओलंपिक की तैयारी कराएंगे।
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स्पोर्ट्स अथारिटी ऑफ इंडिया के कोच कुलवंत ने कहा कि यह ललिता की कमजोरी का नाइजीरिया की खिलाड़ी ने फायदा उठाया। हमें इसका डर था वही हो गया। खैर सिल्वर मेडल आया इसकी खुशी है।

ये हैं उपलब्धियां
- वर्ष 2011 में एशियन कैडेट कुश्ती चैंपियनशिप में रजत
- वर्ष 2011 में कैडेट वर्ल्ड कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य
- वर्ष 2011 में जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में भागीदारी
- वर्ष 2012 में जूनियर एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य
- वर्ष 2013 में जूनियर एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में भागीदारी

खेलना चाहती थी हॉकी, कुश्ती में गाड़े झंडे

ललिता के पिता जोगेंद्र सहरावत ने बताया कि ललिता को शुरू से ही खेल का काफी शौक था। वेद सीनियर सेेेकेंडरी स्कूल की हॉकी की टीम काफी स्ट्रांग है। ललिता की सेहत शुरू से काफी अच्छी थी, लेकिन उसकी हाइट थोड़ी कम थी। इसी कारण से जब वह हॉकी खेलने जाती थी, तो वहां उसको खेलने का मौका नहीं मिलता था। इस कारण से अक्सर वह रोने लग जाती थी। एक दिन स्कूल के डीपीई दलबीर सिंह ने उसे सिंगल इवेंट में खेलने को कहा। इसके बाद उन्होंने ललिता को महावीर स्टेडियम में खेलने के लिए भेजने लगे, वहां लड़कियों की नर्सरी है। स्टेडियम में सतबीर सिवाच की देखरेख में प्रशिक्षण लेने लगी। पिता ने बताया कि वह खुद भी कुश्ती खेलते थे।

पिता जोगेंद्र सहरावत ने बताया कि उनकी दो बेटियां है। एक बेटी चिकित्सक हैं और दूसरी बेटी खेलों में उनका नाम रोशन कर रही हैं। मां उषा रानी भी अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रही हैं। उषा रानी के मुताबिक वह तो अनपढ़ है, लेकिन उनकी बेटियों ने उनके नाम को रोशन कर दिया है।

जोगेंद्र सहरावत के मुताबिक मंगलवार रात को ही ललिता का फोन आया था। उसने कहा था कि पापा आप यकीन रखना मैं पदक जीतकर जरूर लौटूंगी। मां उषा रानी ने बताया कि ललिता को खाने में देसी खाना पसंद है। वह खेलने व पढ़ाई के साथ साथ घर में भी हाथ बंटाती है। जोगेंद्र सहरावत के मुताबिक बलराज नैन, कोच कुलवंत, संजय, उषा शर्मा को इस जीत का श्रेय देते हैं। उधर भाई कर्मजीत, सत्यजीत, विपुल, फूफा बीर सिंह कासनिया, आंटी बाला, कमलेश, अंकल जगदीश का कहना है कि उन्हें ललिता पर गर्व है कि उसने देश का नाम रोशन किया है।
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