किसी जमाने में हांसी को आसी और असीगढ़ के नाम से जाना जाता था। क्योंकि यहां पर अव्वल दर्जे की तलवारें बनाई जाती थी। विश्वभर में तलवारों के निर्माण के लिए प्रसिद्ध इस स्थान का आज भी पुरातात्विक महत्व है। क्योंकि वर्तमान में भी यहां पर पृथ्वीराज चौहान का किला है। जिसको पुरातत्व विभाग ने अधिग्रहित किया हुआ है। इस किले के मुख्य बड़सी गेट के नाम से जाना जाता है। बाजार के बीचों बीच स्थित इस बड़सी दरवाजे के नीचे से लोग गुजरते हैं।
यह किला सम्राट पृथ्वीराज चौहान के समय में बना था। किले और बड़सी दरवाजे को देखने के लिए पर्यटक दूर-दूर से यहां आते हैं। अंग्रेजों ने इस किले पर सेना का कैंट बनाया था। करीब सवा दो सौ वर्ष पूर्व राजा जॉर्ज थॉमस ने तब हरियाणा को अलग राज्य बनाया था। हांसी को राजधानी बनाया था। वह इसी किले में रहकर राज चलाते थे। यहां पर ही हॉर्स रेजिमेंट की स्थापना की गई थी। जो आज भी भारतीय सेना में है। आज भी शहर में बहुत से जैन व हिंदू धर्म के मंदिर हैं। यहां मुस्लिम समुदाय की चार कुतुब दरगाह विश्व प्रसिद्ध दरगाह है। विदेशों से भी यहां मुस्लिम श्रद्धालु नमाज अदा करने आते हैं। जनवरी 1982 में ऐतिहासिक किले से 57 दिगंबर जैन प्रतिमाएं तांबे के टोकने में रखी हुई बच्चों को गिल्ली डंडा खेलते हुए दिखाई दी। इन प्रतिमाओं को हिसार रोड पर स्थित श्री जैन अतिशय क्षेत्र पुण्योदय तीर्थ में रखवाया हुआ है। यहां पर काफी संख्या में बाहर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इसके अलावा डेरा बाबा जगन्नाथपुरी समाधा मंदिर व श्रीकाली देवी मंदिर में बाहर से काफी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।