राज्य स्तरीय कृषि कार्यशाला में मंच पर बैठे मुख्य वक्ता के पूर्व वीसीएस खोखर सतीश कनाडा एवं अन्
हिसार। एचएयू के पूर्व कुलपति प्रो. केएस खोखर ने कहा कि प्रदेश की खेती प्रवासी मजदूरों पर निर्भर होकर रह गई है। महंगे बीज, उर्वरकों और कीटनाशकों के अधिक प्रयोग से खेती की लागत बढ़ रही है। खाद्यान्न की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। इससे बचने और किसानों को आय बढ़ाने के लिए सस्ती, टिकाऊ व वैज्ञानिक आधार पर जहरमुक्त खेती को अपनाना होगा।
प्रो. खोखर शनिवार को राय बहादुर डॉ. रामधन सिंह (आरडीएस) मेमोरियल ट्रस्ट ट्रस्ट की ओर से जाट धर्मशाला में कृषि को पुनर्जीवित कैसे करें विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक रोजगार देने वाले क्षेत्र खेती पर सरकारों का सबसे कम ध्यान है। खेती पर लगातार खर्च बढ़ रहा है लेकिन उस अनुपात में भाव नहीं मिल रहा है। इसी कारण देश में 36 प्रतिशत किसान खेती छोड़कर शहरों या दूसरे धंधों की ओर जा रहे हैं।
डॉ. सुरेंद्र दलाल कीट साक्षरता मिशन एवं हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में अपने अध्यक्षीय भाषण में पशुचिकित्सा वैज्ञानिक डॉ. सतीश कालरा ने कहा कि किसानों को विज्ञान की जानकारी रखनी चाहिए। कृषि में प्राकृतिक जैव पद्धति का समावेश भी जरूरी है। फसलों की बिक्री के लिए पूर्ण व्यवस्था की जाए और भंडारण का भी प्रबंधन हो।
हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति के राज्य अध्यक्ष प्रो. प्रमोद गौरी और जेएनयू से जुड़े दिल्ली साइंस फोरम के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. दिनेश अबरोल ने भी कृषि उपज और किसानों की आय बढ़ाने के उपाय बताए। इससे पूर्व ट्रस्ट के प्रधान बलजीत सिंह भ्याण ने अतिथियों और प्रतिनिधियों का स्वागत किया। डॉ. केएस बांगडवा और डॉ. धर्म सिंह ने संचालन किया। इस अवसर पर पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ में समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार चौधरी, डॉ. रणबीर दहिया, डॉ. सुरेंद्र सिंह, डॉ. करतार सिंह आदि मौजूद रहे।