हिसार से सिरसा रोड पर बन रहा तिरुपति बालाजी धाम दक्षिण शैली की तर्ज पर बनाया जा रहा है। मंदिर का कार्य अंतिम चरणों में चल रहा है। खास बात है कि इस मंदिर का निर्माण करने के लिए साउथ से कारीगर पहुंचे हैं। मंदिर की दीवारों पर सुंदरकलाकृति उकेरी गई है। पिल्लराें पर दक्षिण भारत की सभ्यता को दर्शाया जा रहा है, जोकि दूर से ही आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अभी से ही मंदिर में पंजाब, हरियाणा के अलावा दिल्ली से श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं।
10 हजार साल तक भी ऐसा ही रहेगा
उत्तर भारतीय संस्कृति व दक्षिण भारतीय संस्कृति में सामंजस्य स्थापित करने में विशेष भूमिका निभाने वाले श्री तिरुपति बालाजी धाम में गोपुरम का निर्माण कार्य प्रगति पर है। 71 फुट ऊंचे गोपुरम के निर्माण में दक्षिण भारत के कारीगर लगे हुए हैं। इसी वर्ष मार्च माह में भगवान श्री वेंकटेश की अनुकंपा एवं श्रीविभूषित श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य त्रिदंडी जीयर स्वामी देवनारायणाचार्य महाराज के आशीर्वाद से गोपुरम के निर्माण के लिए पूजन किया गया था।
मंदिरों में गोपुरम का विशेष महत्व होता
दक्षिण भारतीय शैली में निर्मित मंदिरों में गोपुरम का विशेष महत्व होता है। गोपुरम को मंदिर का मुख्यद्वार कहा जा सकता है। जब भी श्रद्धालु ऐसे मंदिरों में जाते हैं तो सबसे पहले प्रवेश द्वारा नजर आता है, जिसे गोपुरम कहते हैं। श्रद्धालु गोपुरम के समक्ष सिर झुकाकर मंदिर में प्रवेश करते हैं। मान्यता है कि गोपुरम के दर्शन मात्र से पाप नष्ट हो जाते हैं। हिसार के श्री तिरुपति बालाजी धाम में गोपुरम पर श्रद्धालुओं को अद्भुत नक्काशी भी देखने को मिलेगी। गोपुरम कई किलोमीटर दूर से ही दिखाई देगा।
शुक्रवार को भगवान की सवारी शोभा यात्रा भी निकाली जाती है
हिसार में अग्रोहा रोड पर टोल प्लाजा के पास स्थापित श्री तिरुपति बालाजी धाम में स्थापित वेंकटेश भगवान, पद्मावती माता, गोदांबा माता, गरुड़, लक्ष्मी नृसिंह, सुदर्शन, रामानुज स्वामी, शठकोप स्वामी, हनुमान के दर्शन भी होंगे। यहां पर स्थापित 42 फुट ऊंचा सोने का गरुड़ स्तंभ, बलिपीठम्, तिरुपति यज्ञशाला व श्रीनिवास गोशाला भी विशेष दर्शनीय हैं। दक्षिण भारतीय शैली में अग्रोहा रोड पर टोल प्लाजा के पास दक्षिण भारतीय शैली में निर्मित श्री तिरुपति बालाजी धाम की नक्काशी व भव्यता श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। धाम में हर शुक्रवार को भगवान की सवारी शोभा यात्रा भी निकाली जाती है। आसपास के अलावा दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं।