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Hisar News: क्षेत्र में सबसे सुरक्षित था गांव तो नाम पड़ा गुढ़ा

Mon, 11 May 2026 02:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
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सिवानी मंडी के गांव गुढ़ा में बने पार्क का प्रवेश द्वार। 
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सिवानी मंडी। भिवानी जिले का गांव गुढ़ा धार्मिक आस्था और देशभक्ति के कारण पूरे क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है। बताया जाता है कि 451 वर्ष पूर्व राजस्थान के नागौर जिले के गांव कचेरा से आए दयाराम नामक व्यक्ति ने इस गांव को बसाया था। उस समय यह स्थान सुरक्षित और शांत माना जाता था। इसी कारण इसका नाम गुढ़ा पड़ा जिसका अर्थ सुरक्षित अथवा छिपा हुआ स्थान माना जाता है। समय बीतने के साथ यह गांव अपनी ऐतिहासिक पहचान, संत परंपरा और सुनियोजित बसावट के कारण अलग मुकाम हासिल कर चुका है।
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करीब 64 एकड़ क्षेत्र में बसे इस गांव की बनावट आकर्षित करती है। गांव की फिरनी और गलियों का स्वरूप पूरी तरह चौरस है, जो किसी शहर की सेक्टर योजना जैसा दिखाई देता है। गांव में करीब 700 घर, लगभग 4500 की आबादी और करीब 2500 मतदाता हैं। गुढ़ा जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर तथा खंड कार्यालय सिवानी से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित है। गांव के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि है। यहां गेहूं, चना, मूंग, मोठ, कपास और बाजरा की खेती बड़े स्तर पर की जाती है। गांव में तीन प्राचीन कुएं भी हैं। इनमें से एक कुआं मीठे पानी का है जबकि अन्य दो खारे पानी के हैं। पुराने समय में यही कुएं ग्रामीणों की प्यास बुझाने का मुख्य साधन हुआ करते थे और आज भी ऐतिहासिक धरोहर माने जाते हैं।

400 वर्ष पुराना भगवान विष्णु मंदिर आस्था का केंद्र

गांव में करीब 400 वर्ष पुराना भगवान विष्णु मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। बाबा रामदेव मंदिर, दादा भोमिया मंदिर, श्री श्याम धाम, शिव परिवार मंदिर और बालाजी मंदिर गांव की धार्मिक पहचान को और मजबूत करते हैं। गांव में स्थित संत कृष्ण दास, संत गोपाल दास, बीरम दास और बाबा बालक दास की समाधियां ग्रामीणों के लिए विशेष श्रद्धा का केंद्र बनी हुई हैं। ग्रामीण बताते हैं कि ये चारों संत तपस्वी और सिद्ध पुरुष थे, जिन्होंने वर्षों तक कठोर तपस्या की थी।
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स्वतंत्रता संग्राम में निभाई अहम भूमिका

गुढ़ा को वीरों और देशभक्तों की भूमि भी कहा जाता है। गांव के बक्सा राम स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं। राम सिंह ने वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहादत देकर गांव का नाम रोशन किया। सेवानिवृत्त सूबेदार ओमप्रकाश ने वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में भाग लेकर देश सेवा की मिसाल पेश की। वर्तमान में भी गांव के अनेक युवा भारतीय सेना, पुलिस तथा अन्य सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं।

शिक्षा, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र में बनाई पहचान

डॉ. दयानंद शर्मा हरियाणा पशुपालन विभाग में डिप्टी डायरेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। राजेंद्र उत्तम भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) में मैनेजर पद पर कार्यरत हैं। राजेंद्र भुक्कल और संदीप उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) में जूनियर इंजीनियर के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। मनीष फोगला, अमित फोगला और सुनील फोगला चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। रवि गट्टाणी, प्रीति गट्टाणी, अनिल सहारण और प्रवीण तरड़ न्यायिक क्षेत्र में गांव का नाम रोशन कर रहे हैं।


उद्योगपति राजेंद्र फोगला ने गांव और क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके सहयोग से गांव में पार्क निर्माण, साध बाबा समाधि प्रांगण में शेड निर्माण, पंचायत घर में कमरा और मुख्य गेट, गांव के चौक में बड़ा चबूतरा तथा श्मशान भूमि में शेड का निर्माण करवाया गया। निकटवर्ती गांव कालोद के मंदिर में मुख्य गेट तथा उपमंडल सिवानी स्थित मॉडर्न संस्कृत सीनियर सेकेंडरी स्कूल के मुख्य द्वार का निर्माण भी उनके सहयोग से कराया गया।

-मनोज तंवर, सरपंच प्रतिनिधि


गांव में 36 बिरादरी के लोग आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ रहते हैं। गांव में कोई भी शुभ कार्य होने पर सबसे पहले साध बाबा की समाधि पर जाकर आशीर्वाद लिया जाता है। भाई दूज पर यहां लगने वाले मेले में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

- आनंद पारीक, पंचायत समिति सदस्य


गांव भाईचारे और धार्मिक आस्था के लिए जाना जाता है। गलियां चौड़ी और साफ हैं। मुख्य चौक और चबूतरा सुंदर तरीके से बनाए गए हैं। लोग नशे से दूर रहकर मिलजुलकर रहते हैं।

- श्रीचंद तरड़

गांव के लोग और उद्योगपति सिवानी क्षेत्र में भी मंदिरों, धर्मशालाओं और स्कूलों में सहयोग देकर सामाजिक कार्य कर रहे हैं। गांव में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है तथा गलियों और चौक में बैठने की अच्छी व्यवस्था है। राजेंद्र फोगला गांव की शान हैं। वे जनसेवा कार्यों में हमेशा बढ़-चढ़कर योगदान देते हैं।

- कर्मवीर बामलिया

गांव धार्मिक आस्था और भाईचारे की मिसाल है। श्री श्याम धाम में प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां नियमित रूप से भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। लोगों को नशा मुक्ति के लिए भी प्रेरित किया जाता है।
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-नंदलाल महाराज
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