हिसार। बाढ़ से बर्बाद फसलों का मुआवजा, खेतों से पानी की निकासी और मजदूरों की अन्य मांगों को लेकर पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति व मनरेगा मजदूर संघर्ष कमेटी ने शुक्रवार को लघु सचिवालय का घेराव किया। किसानों-मजदूरों ने करीब तीन घंटे तक नारेबाजी कर सरकार के खिलाफ विरोध जताया। इससे पहले प्रदर्शनकारी एचएयू गेट नंबर चार से मार्च करते हुए लघु सचिवालय परिसर पहुंचे। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं।
किसान नेताओं ने कहा कि बाढ़ से हिसार समेत पूरे प्रदेश में लाखों एकड़ फसल बर्बाद हो गई। एक किसान ने प्रति एकड़ लगभग 50 हजार रुपये खर्च किया, लेकिन सरकार सिर्फ 7 से 15 हजार रुपये मुआवजा देने की बात कर रही है। इतना तो खाद-बीज का खर्च भी पूरा नहीं करता। खेती पर निर्भर मजदूरों के लिए भी कोई मदद घोषित नहीं की गई। किसानों ने मांग रखी कि फसलों का 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा और मजदूरों को तीन महीने की दिहाड़ी एक साथ दी जाए। धरने गोपाल ओड नंगथला, अनिल गोरछी, कृष्ण माजरा, रमेश सुलचानी, सारज लुदास, चरणपाल भुल्लर, संदीप धुंधवाल, कुलदीप हिंदुस्तानी, जंग बहादुर पुनिया आदि ने संबोधित किया।
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किसानों की प्रमुख मांगें
बारिश से खेतों में जमा पानी तुरंत निकाला जाए।
बर्बाद फसलों का मुआवजा 50 हजार रुपये प्रति एकड़ दिया जाए।
बंद मनरेगा कार्य तुरंत शुरू किए जाएं और इसे खेती से जोड़ा जाए।
भारी बारिश से क्षतिग्रस्त मकानों का मुआवजा दिया जाए।
बीमा कंपनियों की गड़बड़ियों पर सख्त कार्रवाई हो।
स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगाई जाए।
2024-25 के केसीसी का ब्याज माफ किया जाए।
बारिश से खराब ट्यूबवेल का मुआवजा दिया जाए।
कपास, बाजरा, मूंग, मूंगफली की एमएसपी पर तुरंत सरकारी खरीद शुरू हो।
बैंक फसल बीमा पॉलिसी नंबर देने से मना कर रहे हैं, उन पर कार्रवाई हो।
एचटी बिजली लाइन कंपनियों की मनमानी पर रोक लगे।
घग्गर ड्रेन के नजदीक आबादी क्षेत्र को पक्का किया जाए।
घग्गर ड्रेन सफाई-बंधाई में हुए भ्रष्टाचार की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो।
डीएपी और यूरिया की किल्लत दूर कर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।