हिसार। मंडियों में किसानों की मेहनत खुले आसमान के नीचे पड़ी है और मौसम की मार का खतरा मंडरा रहा है। धान, बाजरा और मूंगफली की लगातार बढ़ती आवक के बीच बारिश से फसल बचाने के पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आ रहे। सरकारी खरीद शुरू नहीं होने और उठान की धीमी गति से मंडियों में फसल का ढेर बढ़ता जा रहा है।
ऐसे में किसानों के खून-पसीने की कमाई पर संकट है। फसल की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी मुख्य रूप से आढ़तियों के भरोसे है। हिसार मंडी में 5556 मीट्रिक टन से अधिक मूंगफली खुले में पड़ी है। जिले की मंडियों से अब तक केवल 38 प्रतिशत फसल का उठान हो पाया है। समय रहते फसल का उठान और सुरक्षित भंडारण नहीं हुआ तो बारिश किसानों और आढ़तियों की परेशानी बढ़ा सकती है।
जिले की मंडियों में धान और बाजरे की आवक भी लगातार जारी है। सोमवार को एक दिन में 2317.20 मीट्रिक टन धान मंडियों में पहुंचा। इससे कुल आवक बढ़कर 24330.90 मीट्रिक टन हो गई। इसी तरह 12 अक्तूबर तक बाजरे की कुल आवक 8204.55 मीट्रिक टन दर्ज की गई।
एक दिन में 808.45 मीट्रिक टन बाजरा मंडियों में आया। आवक बढ़ने के साथ फसल को रखने के लिए जगह की जरूरत भी बढ़ रही है। उठान धीमा होने से खुले में रखी फसल की सुरक्षा चुनौती बन गई है। मंडी में फसल लेकर पहुंचे किसानों को अब उसके सुरक्षित रहने की चिंता सता रही है।
बारिश होने पर अनाज और मूंगफली की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। आढ़तियों के सामने भी फसल को भीगने से बचाने की जिम्मेदारी है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि मंडियों में तिरपाल और शेड की व्यवस्था की गई है। आढ़तियों को भी अपने स्तर पर इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं।
एक दिन में पहुंचा 2317 मीट्रिक टन धान
सोमवार तक जिले की मंडियों में धान की कुल आवक 24330.90 मीट्रिक टन हो गई है। एक दिन में 2317.20 मीट्रिक टन धान पहुंचा। उकलाना मंडी में सबसे अधिक 1170.40 मीट्रिक टन, बरवाला में 846.50 मीट्रिक टन, पाबड़ा में 251.30 मीट्रिक टन और आदमपुर में 49 मीट्रिक टन धान की आवक हुई। हिसार, बालसमंद और दौलतपुर मंडियों में इस दिन धान की आवक दर्ज नहीं हुई।
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शेड और तिरपाल से बचाएंगे फसल
हिसार मंडी में किसानों की फसल खुली बोली पर आढ़ती खरीद रहे हैं। आढ़तियों के पास खुद के तिरपाल उपलब्ध हैं। जरूरत पड़ने पर वे फसल को बारिश से बचाने के प्रबंध करेंगे। सरकार की तरफ से वहां चार शेड बने हुए हैं। अधिकतर फसल शेड के नीचे होती है। - अशोक कुमार, सुपरवाइजर मंडी हिसार।
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सात मंडियों में दिए 1500 तिरपाल
हिसार जिले की चार और हांसी की तीन मंडियों में तिरपाल उपलब्ध करवाए गए हैं। हिसार की चार मंडियों में एक हजार और हांसी की तीन मंडियों में 500 तिरपाल की व्यवस्था की गई है। सभी आढ़तियों को अपने स्तर पर इंतजाम करने के लिए भी अलर्ट किया है। मंडी सचिव को व्यवस्था बनाने के विशेष निर्देश दिए हैं। - गगन जोशी, डीएमईओ हिसार।