हिसार। आखिरकार नेशनल हाईवे बनने के 10 साल बाद सर्विस लेन बनेगी। इसके बनने से करीब 6 हजार विद्यार्थियों का शिक्षा के मंदिर तक पहुंचने का रास्ता सुरक्षित होगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को सर्विस लेन बनने में बाधा बन रहे पेड़ों को वन विभाग से काटने की अनुमति मिल गई। अब जल्द ही सर्विस लेन का निर्माण शुरू हो जाएगा।
वर्ष 2015 में हिसार-रोहतक नेशनल हाईवे का निर्माण हुआ था। उस समय एनएचएआई की तरफ से हाईवे किनारे बने राजकीय महिला महाविद्यालय और राजकीय बहुतकनीकी संस्थान के लिए सर्विस लेन का निर्माण नहीं किया गया। हाईवे निर्माण के बाद कई वर्षों तक एनएचएआई ने यहां सर्विस लेन की सुध नहीं ली। जब इसकी सुध ली गई तो इसके निर्माण में पेड़ बाधा बन गए। अब वन विभाग की तरफ से इन पेड़ों को काटने की अनुमति मिलने से यह बाधा दूर हो गई है और सर्विस लेन बनाने का रास्ता साफ हो गया है।
दो साल पहले अलॉट हो चुका है टेंडर
एनएचएआई की तरफ से फरवरी 2023 में कैंट के सामने करीब 400 मीटर और राजकीय बहुतकनीकी संस्थान व राजकीय महिला महाविद्यालय के सामने करीब 1-1 किलोमीटर लंबी सर्विस लेन बनाने के लिए टेंडर अलॉट कर दिया था। इस टेंडर की लागत करीब 5 करोड़ रुपये थी। एजेंसी ने कैंट के सामने सर्विस लेन का निर्माण कर दिया था लेकिन यहां अभी तक सर्विस लेन नहीं बन सकी।
हादसे की बनी रहती है संभावना
यहां हाईवे किनारे सिथत राजकीय बहुतकनीकी संस्थान और राजकीय महिला महाविद्यालय में करीब 6 हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं। मगर हाईवे पर आते ही उन्हें शिक्षण संस्थान तक आने-जाने के लिए गलत साइड में चलना पड़ता है। ऐसे में हमेशा हादसे की संभावना बनी रहती है। यहां कई बार हादसे भी हो चुके हैं।
एयरपोर्ट चौक से पुल तक बनाई जाएगी सर्विस लेन
अधिकारियों के अनुसार पहले लेन के निर्माण के लिए करीब 350 पेड़ काटे जाएंगे। इन पेड़ों काटने की एवज में उनकी तरफ से वन विभाग को एक करोड़ रुपये दिए गए हैं। दोनों तरफ यह सर्विस लेन एयरपोर्ट चौक से लेकर बरवाला चुंगी तक बने तक पुल तक बनाई जाएगी जिसकी लंबाई करीब एक किलोमीटर होगी।
- वन विभाग से पेड़ काटने की अनुमति मिल गई है। अब जल्द ही सर्विस लेन का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। - विपिन मंगला, प्रोजेक्ट निदेशक, एनएचएआई
सर्विस लेन से बनने से संस्थान को काफी फायदा होगा। सर्विस लेन न होने से यहां हमेशा हादसे की संभावना बनी रहती है। हम काफी समय से इसके निर्माण की मांग उठा रहे थे। - सुनील गाबा, प्राचार्य, राजकीय बहुतकनीकी संस्थान