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जो पड़ोसी मारते थे ताने, आज वे दे रहे सम्मान

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शिवांगी पाठक अपनी मां के साथ सेल्फी लेते हुए - फोटो : Hisar
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हिसार। मात्र साढ़े 14 साल की उम्र में शिवांगी पाठक ने चोटियों को फतह करने की ठान ली, मगर यह बात पड़ोसियों को बिल्कुल भी रास नहीं आई। पड़ोसियों के ताने मारने शुरू कर दिए मगर शिवांगी ने इन सभी तानों को दरकिनार करते हुए पहाड़ों को छूने का लक्ष्य बना लिया और उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। 16 साल की उम्र ने शिवांगी ने माउंट एवरेस्ट को फतह कर विश्व रिकॉर्ड बना लिया। जो ताना मारते थे आज वहीं लोग शिवांगी का सम्मान कर रहे हैं। शिवांगी ने 16 मई 2018 को माउंट एवरेस्ट फतह कर तिरंगा लहराया था।
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शिवांगी बताती है कि जब वह साढ़े 14 साल की थी तो वह एक दिन मां आरती पाठक के साथ सेमिनार में गई थी। इस सेमिनार में पर्वतारोहियों की वीडियो दिखा रहे थे। इस दौरान शिवांगी ने भी वीडियो देेखी तो मां ने कहा कि बेटी तुझे वीडियो इतनी अच्छी लग रही है तो तू भी एवरेस्ट को फतह कर ले। उसके बाद शिवांगी ने चोटियों को फतह करने की तैयारी शुरू कर दी।
...तीनों कोर्स पहले प्रयास में किए पूरे
शिवांगी की मां आरती पाठक ने बताया कि पहले बेटी ऋषिकेश गई और वहां पर बंजीजंपिंग को पहले प्रयास में पार कर लिया। फिर शिवांगी का हौसला और भी बढ़ गया। उसके बाद बेटी को जम्मू कश्मीर में ट्रेनिंग के लिए भेज दिया गया। लद्दाख चली गई, वहां पर हर कोर्स में प्रथम रही। शिंवागी बताती हैं कि उन्होंने तीन कोर्स किए थे। जिसमें पहला बेसिक, दूसरा एडवांस और तीसरा एडवेंचर कोर्स शामिल हैं। तीनों ही कोर्स में वह पहले नंबर पर रही। उसके बाद शिवांगी को नेपाल भेजा गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया कि बच्ची की उम्र बहुत कम है। मगर शिवांगी की काबिलियत को देखकर उन्होंने हां भर ली। शिवांगी पाठक ने अपनी सफलता का श्रेय माता आरती पाठक, पिता राजेश पाठक और टीचर रींकू पानू को दिया है।
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इन चोटियों को फतह कर चुकीं शिवांगी
- माउंट एवरेस्ट
- साउथ अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो
- यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस
- विश्व के चौथे सबसे ऊंचे पर्वत ल्होत्से
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