हिसार। खेतों में धुएं की चादर बिछने से पहले पराली प्रबंधन का संदेश गांव-गांव पहुंचाने की कवायद तेज हो गई है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) ने प्रदेश के करीब 6,000 किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया है।
इसके लिए विश्वविद्यालय की ओर से सितंबर माह के अंत तक 46 ग्रामस्तरीय, 14 खंड स्तरीय और 12 जिलास्तरीय जागरूकता कार्यक्रमों के साथ 17 विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इनमें खेत स्तर पर प्रदर्शन एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की उपयुक्त तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। अभियान आगामी महीनों में भी जारी रहेगा और गेहूं की बिजाई शुरू होने तक किसानों को निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन व आवश्यक सलाह उपलब्ध कराई जाएगी।
कुलपति प्रो. बीआर काम्बोज ने बताया कि कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोधपुर के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख धान उत्पादक जिलों में कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के माध्यम से वर्तमान धान कटाई सीजन में अभियान तेज किया गया है।
इसका उद्देश्य पराली जलाने की समस्या को रोकना तथा किसानों को इन-सीटू (खेत में) और एक्स-सीटू (खेत से बाहर) फसल अवशेष प्रबंधन की व्यावहारिक, किफायती एवं स्थानीय रूप से उपलब्ध तकनीकें अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
उन्होंने बताया कि केवीके, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, जिला प्रशासन, किसान उत्पादक संगठनों, सहकारी समितियों, कस्टम हायरिंग सेंटरों और अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय कर रहे हैं ताकि किसानों को आवश्यक मशीनरी, संसाधन और तकनीकी सुविधाएं मिल सकें। किसानों को पराली को खेत में उचित ढंग से प्रबंधित करने तथा पशु चारे, जैव ऊर्जा और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों में उपयोग करने के विकल्पों की जानकारी दी जा रही है।
फसल अवशेष कचरा नहीं, मूल्यवान संसाधन है : डॉ. नरेश
विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. नरेश कौशिक ने बताया कि केवीके किसानों को सरकारी योजनाओं के तहत उपलब्ध वित्तीय सहायता और अन्य सहयोग की जानकारी भी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष कचरा नहीं बल्कि एक मूल्यवान संसाधन है। केवीके नेटवर्क का उद्देश्य फसल अवशेष प्रबंधन को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संसाधन बचत, गेहूं की समय पर बिजाई, ग्रामीण उद्यमिता और जलवायु-सक्षम कृषि से जोड़ना है।