हिसार। करीब साढ़े चार एकड़ में फैली पुरानी सब्जी मंडी की जमीन रक्षा मंत्रालय के नाम मिली है। निगम प्रशासन को तहसील कार्यालय से मिले राजस्व रिकॉर्ड से इस बात की पुष्टि हुई है। अब नगर निगम प्रशासन इस जमीन को अपने किसी प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकता है। अब पिछले छह दशक से यहां व्यापार कर रहे निगम की करीब 50 दुकानों के दुकानदारों का कारोबार प्रभावित होगा। इन दुकानदारों को अब प्रदेश सरकार की 20 साल की योजना का लाभ भी नहीं मिल सकेगा।
नगर निगम की समीक्षा बैठक में पुरानी सब्जी मंडी की जमीन का मुद्दा उठा था। इस दौरान पार्षदों ने राय रखी थी कि इस जमीन का इस्तेमाल निगम के किसी बड़े प्रोजेक्ट के लिए किया जा सकता है। कुछ पार्षदों ने बताया था कि यह जमीन रक्षा मंत्रालय के नाम है। इसके बाद तहसील कार्यालय से इस जमीन का रिकॉर्ड निकलवाया गया। यह पता चल सके कि आखिर यह जमीन किसकी है।
दुकानदार कर रहे मालिकाना हक पाने के लिए आवेदन
पुरानी सब्जी मंडी में नगर निगम की करीब 50 दुकानें हैं। मुख्यमंत्री ने कुछ समय पहले घोषणा की थी कि निगम की दुकानों के 20 साल से ज्यादा पुराने किरायेदारों को मालिकाना हक दिया जाएगा। हालांकि इस मंडी को नई सब्जी मंडी में शिफ्ट किया जा चुका है। मगर कुछ दुकानदारों ने यहां दुकानों से कब्जा नहीं छोड़ा और वे अदालत में चले गए। इनमें से कुछ दुकानदारों ने निगम में इन दुकानों का मालिकाना हल लेने के लिए आवेदन भी किया हुआ है। चूंकि अब यह जमीन ही निगम की नहीं है तो निगम इस जमीन पर बनीं दुकानों का मालिकाना हक किसी और कैसे दे सकता है।
जाम से निजात दिलाने को वर्ष 2014 में शिफ्ट हुई थी सब्जी मंडी
चूंकि पुरानी सब्जी मंडी के कारण शहर में जाम की काफी समस्या रहती थी और वहां जगह की काफी कम थी। इस देखते हुए वर्ष 2014 में इस सब्जी मंडी को मिल गेट रोड पर बनाई गई नई सब्जी मंडी में शिफ्ट कर दिया गया था। हालांकि इसके बाद यहां सब्जियों का व्यापार हो रहा है। यहां कई व्यापारियों ने सब्जियों व फलों के गोदाम बना रखे हैं। इसके अलावा यहां कई कबाड़ियों ने गोदाम बना रखे हैं। पिछले माह इन्हीं गोदामों में आग लग गई थी, जिसे बुझाने में दमकल विभाग को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। इस घटना के बाद मेयर गौतम सरदाना ने भी अधिकारियों से इस जमीन का रिकॉर्ड तलब किया था।
इस मंडी के नई सब्जी मंडी में शिफ्ट होने के बाद इसे डी-नोटिफाइड कर दिया गया था। मगर नई सब्जी मंडी में सिर्फ सब्जी व्यापारियों को ही दुकानें अलॉट की गईं, जबकि इस पुरानी सब्जी मंडी में किराना आदि की भी दुकानें थीं। चूंकि इन दुकानदारों को नई सब्जी मंडी में दुकानें नहीं मिली तो इन्होंने पुरानी सब्जी मंडी की दुकानों को भी खाली नहीं किया। अब भी कुछ दुकानदार इन्हीं दुकानों में अपना व्यापार चला रहे हैं।
जब से यह पुरानी सब्जी मंडी बनी थी, तब से हमारी दुकान यहां चल रही है। नई सब्जी मंडी में हमें दुकान नहीं दी गई। अब 20 वर्ष वाले नियम के तहत हमने मालिकाना हक लेने के लिए निगम में आवेदन किया हुआ है। अब यह जमीन किसकी है, इस बारे में हमें कुछ लेना-देना नहीं है। अगर यह जमीन किसी अन्य विभाग की है तो यहां सब्जी मंडी कैसे बनाई गई थी। - नरेंद्र गुप्ता, दुकानदार
पुरानी सब्जी मंडी के जमीन का रिकॉर्ड मिल गया है। यह जमीन रक्षा मंत्रालय के नाम मिली है। अब इस जमीन का अब क्या करना है, इस बारे में विमर्श किया जाएगा। - अनिल सैनी, सीनियर डिप्टी मेयर, नगर निगम