हिसार। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने हिसार जिले के कई सरकारी स्कूलों की खतरनाक हालत पर संज्ञान लेते हुए हिसार के उपायुक्त को आठ सप्ताह के अंदर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। आयोग की पीठ में शामिल आयोग अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा और सदस्य कुलदीप जैन व दीप भाटिया शामिल ने अपने आदेश में कहा कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा और जीवन के लिए गंभीर खतरा है। आयोग ने इस मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को तय की है।
आयोग ने कहा कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने 27 सरकारी स्कूलों की इमारतों को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद भी इनमें कक्षाएं चलाई जा रही हैं। इससे सैकड़ों विद्यार्थियों का जीवन खतरे में है। कई स्कूलों में बच्चों को खुले बरामदों, सील किए गए कमरों, प्रयोगशालाओं और स्टाफ हॉल में फर्श पर बैठकर पढ़ना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में यह खतरा और बढ़ गया है। जहां सांप काटने, मलबा गिरने और जलभराव आशंका रहती है।
आयोग ने कहा कि ऐसी स्थिति संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) तथा अनुच्छेद 21ए (शिक्षा का अधिकार) का उल्लंघन है। यह बच्चों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन और मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा का भी उल्लंघन है, जो प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार प्रदान करती है।
राजस्थान में हाल ही में हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए आयोग ने कहा कि जैसलमेर में स्कूल का गेट गिरने से सात वर्षीय बच्चे की मौत और झालावाड़ में स्कूल भवन ढहने से सात छात्रों की मौत जैसी घटनाएं हरियाणा में तुरंत रोकथाम उपायों की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।
प्रोटोकॉल, सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि आयोग ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव, माध्यमिक शिक्षा के महानिदेशक, उपायुक्त हिसार, अतिरिक्त उपायुक्त हिसार और जिला शिक्षा अधिकारी हिसार को आठ सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने प्रत्येक असुरक्षित भवन की वर्तमान स्थिति, मौजूदा सुरक्षा उपाय, प्रभावित छात्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था, पुनर्निर्माण की समयसीमा और बजट, प्रभावित छात्रों की संख्या, किसी भी चोट या बीमारी का आंकड़ा, तथा मरम्मत या स्थानांतरण में देरी के कारणों का विवरण मांगा है।असुरक्षित स्कूल भवनों पर मानव अधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट, 8 सप्ताह में देना होगा जवाब
असुरक्षित स्कूल भवनों पर मानव अधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट, 8 सप्ताह में देना होगा जवाब
इपैक्ट लोगो और ईपीएस लगाए
माई सिटी रिपोर्टर
हिसार। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने हिसार जिले के कई सरकारी स्कूलों की खतरनाक हालत पर संज्ञान लेते हुए हिसार के उपायुक्त को आठ सप्ताह के अंदर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। आयोग की पीठ में शामिल आयोग अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा और सदस्य कुलदीप जैन व दीप भाटिया शामिल ने अपने आदेश में कहा कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा और जीवन के लिए गंभीर खतरा है। आयोग ने इस मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को तय की है।
आयोग ने कहा कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने 27 सरकारी स्कूलों की इमारतों को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद भी इनमें कक्षाएं चलाई जा रही हैं। इससे सैकड़ों विद्यार्थियों का जीवन खतरे में है। कई स्कूलों में बच्चों को खुले बरामदों, सील किए गए कमरों, प्रयोगशालाओं और स्टाफ हॉल में फर्श पर बैठकर पढ़ना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में यह खतरा और बढ़ गया है। जहां सांप काटने, मलबा गिरने और जलभराव आशंका रहती है।
आयोग ने कहा कि ऐसी स्थिति संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) तथा अनुच्छेद 21ए (शिक्षा का अधिकार) का उल्लंघन है। यह बच्चों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन और मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा का भी उल्लंघन है, जो प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार प्रदान करती है।
राजस्थान में हाल ही में हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए आयोग ने कहा कि जैसलमेर में स्कूल का गेट गिरने से सात वर्षीय बच्चे की मौत और झालावाड़ में स्कूल भवन ढहने से सात छात्रों की मौत जैसी घटनाएं हरियाणा में तुरंत रोकथाम उपायों की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।
प्रोटोकॉल, सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि आयोग ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव, माध्यमिक शिक्षा के महानिदेशक, उपायुक्त हिसार, अतिरिक्त उपायुक्त हिसार और जिला शिक्षा अधिकारी हिसार को आठ सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने प्रत्येक असुरक्षित भवन की वर्तमान स्थिति, मौजूदा सुरक्षा उपाय, प्रभावित छात्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था, पुनर्निर्माण की समयसीमा और बजट, प्रभावित छात्रों की संख्या, किसी भी चोट या बीमारी का आंकड़ा, तथा मरम्मत या स्थानांतरण में देरी के कारणों का विवरण मांगा है।