लोहारी राघो रामलीला मंच पर अभ्यास करते कलाकार। स्रोत: आयोजक
नारनौंद। रामकथा के मंचन और परंपरा की 77 साल पुरानी विरासत को संजोए लोहारी राघो फिर आस्था के रंग में रंगने के लिए तैयार है। शुक्रवार से श्रीरामा रामलीला क्लब के बैनर तले मंचन शुरू होगा। इस बार दर्शक सोशल मीडिया के माध्यम से घर बैठे भी रामलीला का सीधा प्रसारण देख सकेंगे।
रामलीला का इतिहास देश के विभाजन और आजादी के दौर से जुड़ा है। इसका आयोजन वर्ष 1949 में शुरू हुआ जबकि तैयारियां 1948 में ही शुरू कर दी गई थीं। रामलीला शुरू करने वाले कई कलाकार वर्ष 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान पाकिस्तान से विस्थापित होकर लोहारी राघो पहुंचे थे।
पाकिस्तान में भी 1933 से 1947 तक रामलीला का मंचन होता था। विभाजन की पीड़ा से उबरने के बाद इन लोगों ने लोहारी राघो में रामलीला की परंपरा शुरू की जिसकी ख्याति शुरुआती वर्षों में ही दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंच गई।
रामलीला के डायरेक्टर मुनीष चराया ने बताया कि हांसी विधायक विनोद भ्याना का भी रामलीला से पुराना नाता रहा है। 1990 के दशक में वे अंगद और रावण की भूमिका निभा चुके हैं।
जानें...किस दिन किस प्रसंग का होगा मंचन
क्लब के प्रधान सेवक गुलशन भ्याना ने बताया कि 10 अक्तूबर को नारद लीला, 11 को श्रवण लीला, 12 को राम जन्म, 13 को सीता स्वयंवर, 14 को राम वनवास, 15 को भरत मिलाप, 16 को सीता हरण, 17 को बाली वध, 18 को सीता खोज और 19 अक्तूबर को लक्ष्मण मूर्छा की लीला का मंचन होगा। 20 अक्तूबर को दशहरा उत्सव के साथ रावण वध का मंचन कर रामलीला का समापन किया जाएगा।