सिरसा। सरकार की ओर से राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिशों के तहत केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने शैक्षणिक ढांचे में बदलाव किया है। इसके तहत माध्यमिक कक्षाओं में विषय भी बढ़ाए गए हैं। इसके लिए शहरवासियों ने भिन्न प्रकार के विचार साझा किए हैं। किसी ने यह बदलाव विद्यार्थियों के लिए सही बताया तो किसी ने इसे विद्यार्थियों पर बोझ बताया।
शहरवासियों का कहना है कि इस बदलाव के तहत अब 10वीं कक्ष में दस विषय पढ़ने होंगे। इनमें से तीन भाषाएं और सात विषय होंगे। इसी तरह 12वीं कक्षा में छह विषय होंगे। इनमें चार विषय और दो भाषाएं होंगी। इससे एक तरफ तो विद्यार्थियों के शिक्षा स्तर में सुधार होगा। इससे विद्यार्थियों का ज्ञान बढ़ेगा। वहीं ज्यादा विषय होने से विद्यार्थियों पर बोझ भी बढ़ जाएगा।
विद्यार्थियों के लिए ये बदलाव अच्छा साबित होगा। क्योंकि विद्यार्थियों को ज्यादा विषय पढ़ने का मौका मिलेगा। एक से ज्यादा भाषा सीखने का भी मौका मिलेगा। इससे विद्यार्थियों के पढ़ने के स्तर में भी सुधार होगा। इसे बोझ समझने के बजाय विद्यार्थी रुचिकर तरीके से पढ़ने का प्रयास करें। - डॉ. मुकेश कुमार, जिला विज्ञान विशेषज्ञ, सिरसा।
सरकार का ये फैसला सही नहीं है। इससे विद्यार्थी ज्यादा संशय में रहेंगे। दुविधा में फंसे विद्यार्थियों को पढ़ाई बोझ लगने लगेगी। - राधेश्याम स्वामी, शहरवासी।
इस फैसले से विद्यार्थियों को एक से ज्यादा भाषाएं सीखने का मौका मिलेगा। बचपन से ही ज्यादा पढ़ने की उसकी आदत बन जाएगी। - श्रवण शर्मा, शहरवासी।
अधिकतर बच्चाें की पढ़ने की आदत छूटने लगी है। इस फैसले से विद्यार्थियों की आदत सुधरेगी। ज्यादा विषय होने पर विद्यार्थी रट्टा नहीं मार सकेगा। - नरेश कुमार, शहरवासी।
इससे विद्यार्थियों पर बोझ बढ़ जाएगा। पहले ही विद्यार्थियों पर किताबों का बोझ होता है। ऐसे में 10 विषय होने से विद्यार्थियों पर बोझ बढ़ जाएगा। - दिनेश कुमार, शहरवासी।