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ये कैसी सरकारी योजना: लघु सिंचाई के लिए कर्ज लेकर बनाया टैंक, अनुदान तो मिला नहीं अब चुकाना पड़ रहा भारी ब्याज

Thu, 30 Mar 2023 10:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा)

सार

हिसार में किसानों को सरकारी योजना का लाभ उठाना ही महंगा पड़ गया। सरकार किसानों को नई तकनीक से कृषि करने के लिए अनुदान देने का वादा तो करती है, लेकिन कई केस ऐसे हैं जहां अनुदान नहीं मिलने की वजह से किसानों को ब्याज तक चुकाना पड़ रहा है।
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demo pic - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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टपका विधि व फव्वारा विधि से सिंचाई के लिए सिंचाई विभाग के साथ-साथ कृषि विभाग भी बड़ा जोर दे रहा है, लेकिन इस साल जिन किसानों ने इन विधियों की स्थापना के लिए टैंक बनवाया है, वे अनुदान के लिए भटक रहे हैं। किसी को तीसरी किस्त का इंतजार है तो किसी को अभी पहली ही नहीं मिली।

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सिंचाई पर होने वाले खर्च में आती है कमी
बागवानी के लिए टपका विधि और सब्जी, सरसों व गेहूं के लिए फव्वारा विधि की सिंचाई को सबसे उपयुक्त माना जाता है। इससे पानी के खर्च को एक तिहाई तक कम करने के साथ ही सिंचाई पर होने वाले खर्च में भी कमी आती है। इसे जल संरक्षण के लिहाज से भी अब तक का सबसे बेहतर विकल्प बताया जा रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए सरकार सबसे अधिक प्रचार में भी लगी है।

योजना के तहत अनुदान के लिए आवेदन करना होता
किसानों को टैंक बनवाने व अन्य उपकरणों की खरीद पर 80 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है। इसके लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होता है। किसानों का कहना है कि इस योजना के तहत अनुदान के लिए आवेदन करना होता है। लघु सिंचाई विभाग के अफसर इसका सत्यापन करते हैं, इसके बाद तीन किस्तों में अनुदान मिलता है।
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किसानों को ब्याज तक चुकाना पड़ रहा
पहली किस्त टैंक निर्माण शुरू करने पर, दूसरी किस्त निर्माण आधा होने पर तथा तीसरी किस्त निर्माण पूर्ण होने के बाद उससे सिंचाई शुरू होने पर मिलता है। जिले में तमाम किसान ऐसे हैं, जिनका टैंक बने चार महीने से अधिक समय बीत गया है, लेकिन अभी तक अनुदान नहीं मिला, जबकि उन्होंने टैंक निर्माण के लिए कर्ज ले रखा है। अनुदान नहीं मिलने की वजह से लिए गए कर्ज पर अब इन्हें ब्याज तक चुकाना पड़ रहा है।

केस वन

किसान पवन कुमार ने अपने खेत में 12 फीट गहरा और 65 गुना 90 फुट चौड़ा टैंक बनवा रखा है। इस रबी सीजन में इससे सिंचाई भी शुरू हो गई। टैंक बनवाने के लिए कर्ज ले रखा है। अब तक दो किस्त मिली है। तीसरी का इंतजार है।

केस दो

किसान महेंद्र ने अपने खेत में 100 गुना 90 फुट चौड़ा व 12 फुट गहरा टैंक बनवाया है। टैंक निर्माण के लिए 3 लाख रुपये एक व्यक्ति से कर्ज लिया था। अभी तीसरी किस्त नहीं मिली है। जबकि इससे संबंधित फाइल चार माह पहले सत्यापित हो चुकी है।

केस तीन

किसान रविंद्र ने अपने खेत में 120 गुना 120 फीट चौड़ा व 12 फुट गहरा टैंक बनवाया है। टैंक बनवाने समेत अन्य उपकरणों की खरीद में लगभग 10 लाख रुपये खर्च हो गए। विभाग की तरफ से एक रुपये का भी भुगतान नहीं हो पाया है।
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अफसराें को भी नहीं है जानकारी

माइक्राे एरिगेशन एंड कमांड एरिया डेवलेपमेंट अथॉरिटी (मीकाडा) के हिसार जिले में कार्यरत अफसरों के पास योजना के प्रबंधन से संबंधित सामान्य जानकारी भी नहीं है। प्रबंधक व एसडीओ का कार्य देख रहे अफसरों का कहना है कि इससे संबंधित सारी जानकारी पंचकूला मुख्यालय से ही मिलती है। स्थानीय अफसर केवल आवेदन से संबंधित पत्रावलियों का सत्यापन करते हैं। बजट की कमी के चलते कई किसानों को किस्त नहीं मिल पाई है, इसकी जानकारी किसानों ने हमें भी दी है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे विभाग के पोर्टल पर दर्ज नंबरों पर संपर्क कर अपनी समस्या का समाधान जान सकते हैं।
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