नारनौंद। गोवंश में लंपी रोग की आशंका को देखते हुए पशुपालन विभाग ने निगरानी और जांच तेज कर दी है। जिला पशु रोग निदान प्रयोगशाला, हिसार की टीम ने दोनों गांवों में संदिग्ध पशुओं की जांच कर कापड़ो और राजथल से आठ पशुओं के सैंपल लिए। जांच के लिए सैंपल जिला पशु रोग निदान प्रयोगशाला हिसार भेजे गए हैं।
विभागीय टीम कापड़ो स्थित गोशाला पहुंची और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, गोशाला संचालकों तथा गोरक्षा समिति के सदस्यों के साथ बैठक की। टीम ने लंपी रोग की आशंका, संदिग्ध पशुओं की पहचान, बचाव के उपाय और पशुओं की देखभाल को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। संदिग्ध गोवंश के लिए शिविर लगाकर आवश्यक दवाइयां भी उपलब्ध करवाई गईं और तीन पशुओं के सैंपल लिए गए।
इसके बाद टीम राजथल पहुंची जहां पिछले दिनों गोवंश में लंपी रोग की आशंका संबंधी सूचनाएं सामने आई थीं। टीम ने संदिग्ध पशुओं की जांच की, आवश्यक टीकाकरण किया और पांच पशुओं के सैंपल लिए।
टीम में कापड़ो के पशु चिकित्सक डॉ. अमित शर्मा, नारनौंद के पशु चिकित्सक डॉ. विनय तथा जिला पशु रोग निदान प्रयोगशाला, हिसार की डॉ. सुजाता के नेतृत्व में विशेषज्ञ शामिल रहे। टीम एंबुलेंस से कापड़ो गोशाला पहुंची।
डॉ. अमित शर्मा ने बताया कि पशुपालन विभाग लंपी रोग की रोकथाम को लेकर सतर्क है और प्रदेशभर में जांच, निगरानी, टीकाकरण व उपचार की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने पशुपालकों से त्वचा पर गांठें, बुखार, सुस्ती या भूख में कमी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत पशु चिकित्सक को सूचना देने की अपील की।
दलशेर आर्य ने बताया कि कापड़ो गांव की ओर से भी रोग की रोकथाम के लिए शिविर लगाया गया और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध करवाई गईं। बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने की सलाह दी गई है।