हिसार। मेहनत और लग्न से हर मुश्किल मुकाम हासिल किया जा सकता है। जज्बा हो तो जीवन में दुख और तकलीफ इंसान को कमजोर नहीं कर सकती। मैंने आठ साल पहले कुश्ती में कॅरिअर की शुरुआत की थी, लेकिन अभ्यास शुरू करने के दो माह बाद ही पिता संजय का निधन हो गया। एक बार निराशा हुई, लगा कॅरियर कैसे आगे बढ़ेगा, लेकिन परिवार ने हौसला दिया।
पिता के सपने को पूरा करने के लिए फिर से मैट पर उतरा और बुलंद हौसले के साथ अंतरराष्ट्रीय पहलवान के रूप में पहचान बना ली है। नेशनल स्तर पर चार पदक जीत चुका हूं। डाबड़ा गांव स्थित चौधरी बजेसिंह शिक्षा एवं कुश्ती प्रशिक्षण केंद्र में कोच राहुल बेरवाल के पास अभ्यास कर रहा हूं। मैं अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप खेल चुका है, हालांकि पदक से चूक गया। निराशा होने की बजाय इससे सबक लेकर फिर से तैयारी में जुटा हूं। मेरा सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत देश का नाम रोशन करना है। (जैसा उगलान के पहलवान सुमित ने बताया)
सचिन की उपलब्धियां
- 2024 में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में रजत पदक
- 2024 में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में रजत पदक
- 2024 में अंडर-23 नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक
- 2022 में सीनियर रैंकिंग चैंपियनशिप में रजत पदक