पराली जलाने वाले टॉप टेन जिले
जिला वर्ष 2020 वर्ष 2021
- फतेहाबाद 2058 1479
- कैथल 1565 1163
- जींद 1183 912
- करनाल 1067 956
- कुरूक्षेत्र 849 538
- अंबाला 808 308
- सिरसा 804 551
- यमुनानगर 512 147
- हिसार 305 245
- सोनीपत 191 219
इन दिनों जली प्रदेश में सबसे अधिक पराली
- 15 अक्तूबर 363
- 23 अक्तूबर 218
- 31 अक्तूबर 353
- 2 नवंबर 203
- 4 नवंबर 228
- 5 नवंबर 331
- 6 नवबर 219
- 9 नवंबर 217
- 13 नवंबर 210
- 16 नवंबर 269
10 क्विंटल पराली जलाने से 1460 किलो कार्बन डाइऑक्साइड
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार 10 क्विंटल पराली जलाने पर 1460 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड, 60 किलो कार्बन मोनो ऑक्साइड, 2 किलोग्राम सल्फर डाइऑक्साइड गैस निकलती है। पराली जलाने से प्रदूषण के अलावा खेतों की उर्वरता भी खत्म होती है। मिट्टी में मौजूद जैविक कार्बन जलकर नष्ट हो जाते हैं। जरूरी पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं। मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी हो जाती है।
सबसे कम पराली जलाने वाले दस जिले
जिला वर्ष 2020 वर्ष 2021
- रोहतक 172 78
- पानीपत 132 154
- पलवल 121 115
- पंचकूला 34 0
- भिवानी 31 12
- झज्जर 28 7
- दादरी 8 0
- फरीदाबाद 9 0
- गुरुग्राम 8 0
- महेंद्रगढ़ 5 0
- नूंह 4 0
- रेवाड़ी 4 0
फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए आरंभ की गई सेंट्रल सेक्टर योजना के सकारात्मक साबित हो रही है। योजना के सफल क्रियान्वयन से वर्ष 2016 के मुकाबले वर्ष 2021 में अवशेष जलाने की घटनाओं में 54 प्रतिशत की कमी आई है। किसानों ने उपकरणों को अपनाया। जिसके चलते अवशेष जलाने की घटना कम हो रही हैं। किसान जागरूक हो रहे हैं। - डॉ. अभिलक्ष लिखी, अतिरिक्त सचिव, केंद्रीय कृषि मंत्रालय।
किसानों को जागरूक करने का काफी असर रहा। इस साल पराली जलाने के कुल 6987 केस दर्ज हुए। अगर वर्ष 2016 से तुलना करें तो करीब 54 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले साल से तुलना करें तो 30 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। हम इसे शून्य तक लाने का लक्ष्य लेकर काम कर रहे हैं। - डॉ. अमरजीत सिंह मान, विशेष सचिव, कृषि विभाग हरियाणा।