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हरियाणा: पिछले साल के मुकाबले 30 प्रतिशत कम जलाई पराली, 2016 की तुलना में 54 प्रतिशत गिरावट

Fri, 03 Dec 2021 01:39 AM IST
भूपेंद्र सिंह सुरेंद्र दलाल, अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा)

सार

हरियाणा के किसान पराली प्रबंधन की तकनीकों को अपना रहे हैं।  रिपोर्ट 75 दिन के आंकड़ों के आधार पर जारी की गई है। 15 सितंबर से 30 नवंबर तक के सेटेलाइट इमेज के आधार पर यह रिपोर्ट बनाई गई है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पिछले साल के मुकाबले इस साल हरियाणा के किसानों ने 30 प्रतिशत पराली कम जलाई। हरियाणा रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर की 15 सितंबर से 30 नवंबर तक की रिपोर्ट कृषि विभाग ने जारी की है। इसमें सेटेलाइट से ली गई इमेज के आधार पर प्रदेश के सभी जिलों का प्रतिदिन का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया है।

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वर्ष 2020 में इन 75 दिनों में 9898 स्थानों पर पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई थी। इस साल यह संख्या 6987 रही। 2016 में 12769 स्थानों पर पराली जलाई गई थी। इसके बाद 2017 में 12338 स्थानों पर पराली जलाई। अगर 2016 से तुलना करें तो पराली जलाने में 54 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है।

किसानों ने प्रदूषण के प्रति जागरूकता को अपनाया। जिसके बाद पराली जलाने की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। पराली को कुछ लोग खरीद भी रहे हैं। जिससे किसानों को एक एकड़ में दो से तीन हजार रुपये मिल रहे हैं। इसके अलावा पराली के जलाने की बजाए उसे नष्ट करने के लिए वैकल्पिक तरीकों को अपनाने लगे हैं।
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प्रदेश सरकार की ओर से पराली को खत्म करने के लिए दूसरे उपाय अपनाने वालों को कई तरह के उपकरण प्रदान किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए आरंभ की गई सेंट्रल सेक्टर योजना भी सकारात्मक साबित हुई। 

2016 के मुकाबले वर्ष 2020 में पराली जलाने की घटनाओं में काफी कमी दिखी

वर्ष 2016 के मुकाबले वर्ष 2020 में पराली जलाने की घटनाओं में काफी कमी दिखी। वर्ष 2020 में यह 64 फीसदी तक कम हो गई थी। कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग ने हरियाणा में सेंट्रल सेक्टर योजना वर्ष 2018-19 में शुरू की थी। इसके तहत फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों की खरीद के लिए व्यक्तिगत तौर पर किसानों को लागत का 50 प्रतिशत और परियोजना लागत का 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। किसानों की सहकारी समितियों, पंजीकृत किसान समितियों, एफपीओ ,पंचायतों को कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना के लिए 80 प्रतिशत तक अनुुदान दिया जाता है। जिसमें सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, जीरो टिल सीड एवं फर्टिलाइजर ड्रिल, मल्चर, पैडी स्ट्रॉ चॉपर, हाइड्रॉलिक रिवर्सिबल मोल्ड बोर्ड हल, क्रॉप रीपर और रीपर बाइंडर जैसी मशीनों को उपलब्ध कराया गया। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए बेलर और हेरक को बढ़ावा दिया है। चालू वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 690.90 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इनमें हरियाणा के लिए 193.35 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया हैं। अतिरिक्त सचिव ने बताया कि वर्ष 2018-19 से 2020-21 के दौरान किसानों को सब्सिडी पर फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के वितरण, कस्टम हायरिंग सेंटर एवं प्रचार के लिए प्रदेश में 499.90 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

पराली जलाने वाले टॉप टेन जिले

जिला                वर्ष 2020         वर्ष 2021
  • फतेहाबाद            2058              1479
  • कैथल                 1565               1163
  • जींद                   1183                 912
  • करनाल               1067                956
  • कुरूक्षेत्र                 849                 538
  • अंबाला                 808                  308
  • सिरसा                 804                  551
  • यमुनानगर           512                  147
  • हिसार                  305                  245
  • सोनीपत               191                  219

इन दिनों जली प्रदेश में सबसे अधिक पराली

  • 15 अक्तूबर         363
  • 23 अक्तूबर         218
  • 31 अक्तूबर         353
  • 2 नवंबर              203
  • 4 नवंबर              228
  • 5 नवंबर              331
  • 6 नवबर              219
  • 9 नवंबर              217
  • 13 नवंबर            210
  • 16 नवंबर            269

10 क्विंटल पराली जलाने से 1460 किलो कार्बन डाइऑक्साइड

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार 10 क्विंटल पराली जलाने पर 1460 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड, 60 किलो कार्बन मोनो ऑक्साइड, 2 किलोग्राम सल्फर डाइऑक्साइड गैस निकलती है। पराली जलाने से प्रदूषण के अलावा खेतों की उर्वरता भी खत्म होती है। मिट्टी में मौजूद जैविक कार्बन जलकर नष्ट हो जाते हैं। जरूरी पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं। मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी हो जाती है।

सबसे कम पराली जलाने वाले दस जिले 

जिला      वर्ष 2020         वर्ष 2021
  • रोहतक        172                78
  • पानीपत       132               154
  • पलवल        121                115
  • पंचकूला        34                  0
  • भिवानी         31                 12
  • झज्जर         28                   7
  • दादरी            8                    0
  • फरीदाबाद      9                    0
  • गुरुग्राम         8                    0
  • महेंद्रगढ़        5                     0
  • नूंह               4                     0
  • रेवाड़ी            4                     0
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फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए आरंभ की गई सेंट्रल सेक्टर योजना के सकारात्मक साबित हो रही है। योजना के सफल क्रियान्वयन से वर्ष 2016 के मुकाबले वर्ष 2021 में अवशेष जलाने की घटनाओं में 54 प्रतिशत की कमी आई है। किसानों ने उपकरणों को अपनाया। जिसके चलते अवशेष जलाने की घटना कम हो रही हैं। किसान जागरूक हो रहे हैं। - डॉ. अभिलक्ष लिखी, अतिरिक्त सचिव, केंद्रीय कृषि मंत्रालय।
 
किसानों को जागरूक करने का काफी असर रहा। इस साल पराली जलाने के कुल 6987 केस दर्ज हुए। अगर वर्ष 2016 से तुलना करें तो करीब 54 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले साल से तुलना करें तो 30 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। हम इसे शून्य तक लाने का लक्ष्य लेकर काम कर रहे हैं। - डॉ. अमरजीत सिंह मान, विशेष सचिव, कृषि विभाग हरियाणा। 

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