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किसानों की पहलवान बेटियां लिख रहीं जीत की इबारत

Mon, 29 Feb 2016 01:49 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला हिसार
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बेटियों को बचाने के लिए प्रदेश में व्यापक स्तर पर मुहिम छिड़ी हुई है। उसी मुहिम के तहत गांव भगाना के किसानों की बेटियां समाज के लिए आइना बनकर उभरी हैं। छोटी उम्र में ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत कर इन बेटियों ने साबित कर दिया है कि अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं।
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हम बात कर रहे हैं गांव भगाना की पहलवान 14 वर्षीय मनीषा और 16 वर्षीय अंकुश देवी की। इन दोनों बेटियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीते हैं। महाबीर स्टेडियम में अभ्यास करने वाली दोनों पहलवान बेटियों ने पांच साल पहले कुश्ती के अखाड़े में अपने हुनर को तराशना शुरू किया था।
शुरुआत गांव से की। गांव में कोच हरिओम ने छोटी लड़कियों को कुश्ती खिलाने का जिम्मा संभाला। बाद में गांव की बेटियों ने शहर में आकर महाबीर स्टेडियम में कोच रेशनी देवी के निर्देशन में अभ्यास शुरू कर दिया। महज दो साल में दोनो बेटियों ने कई पदक जीते।
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अंकुुश देवी की उपलब्धिगांव में कोच हरिओम के मार्गदर्शन में अंकुश देवी ने कई उपलब्धियां हासिल की। अंकुश का चयन लखनऊ में लगे इंडिया कैंप में हो गया। वहां से अंकुश देेवी को 38 किलोग्राम भारवर्ग में सब-जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए चुन लिया गया। इसमें अंकुश ने रजत पदक जीता।
मनीषा की उपलब्धिइसी वर्ष जनवरी में हुए सब-जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में मनीषा ने 38 किलोग्राम भारवर्ग में गोल्ड मेडल जीता। इसी प्रतियोगिता में अंकुश देवी ने 43 किलोग्राम भारवर्ग में गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। मनीषा ने हाल ही में तेलंगाना में हुई पायका सब-जूनियर प्रतियोगिता में भी गोल्ड मेडल हासिल किया। अंतरराष्ट्रीय पहलवान गीतिका जाखड़ और पूजा ढांडा को अपना आदर्श मानने वाली ये दोनों खिलाड़ी अब जून में होने वाली सब जूनियर एशिया और सब-जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी में जुटी हैं।
कोच ने तराशा हुनरगांव की मिट्टी से तैयार हुईं पहलवान बेटियां एक के बाद एक पदक बटोरने लगीं। गांव की इन दो छोटी खिलाड़ियों सहित चार अन्य लड़कियों पर हिसार में कोच रोशनी देवी की नजर पड़ी तो वे इनको हिसार ले आईं और महावीर स्टेडियम में अभ्यास कराने लगी। बेहतर मार्गदर्शन मिला तो दोनों का हुनर और निखरने लगा।
पढ़ाई में भी अव्वलगांव के ही एक निजी स्कूल में पढ़ने वाली अंकुश और मनीषा पढ़ाई में भी अव्वल हैं। मनीषा ने आठवीं कक्षा में 81 तो अंकुश देवी ने 78 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। दोनों के पिता किसान हैं और मां गृहिणी। मनीषा की मां सुमन देवी स्वयं कबड्डी की खिलाड़ी भी रही हैं। वे चाहती हैं कि उनकी बेटी मनीषा ही नहीं बल्कि उनके साथ अभ्यास करने वाली गांव की अन्य छह बेटियां भी ओलंपिक तक खेले और गांव का नाम रोशन करे।
हिसार में रहकर करती हैं अभ्यासदोनों लड़कियां अपने गांव की अन्य चार पहलवान लड़कियों के साथ हिसार में रहती हैं। इनमें अंजू, मोनिका, अंजू देवी आदि शामिल हैं। सभी खिलाड़ी महाबीर स्टेडियम में सुबह 6 बजे से 8 बजे तक और शाम को 4 से लेकर 8 बजे तक कड़ा अभ्यास करती हैं।
यह बोले पिताअंकुश के पिता राममेहर बताते हैं कि शुरुआत में कुछ लोग ऐसे भी थे जो बेटियों का खेलना उचित नहीं मानते थे। लेकिन अंकुश और गांव की पांच और लड़कियों ने एक के बाद एक पदक जीतकर उन लोगों का मुंह बंद कर दिया है।
मनीषा के पिता जगदीप शर्मा ने बताया कि हमारी बेटी ने हमें गर्वित होने का मौका दिया है। हमारी बेटी जब तक खेलना चाहेगी तब तक हम उसे खिलाएंगे। छोटी उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतने से हौसले बुलंद हैं।
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