हिसार। किसानों को उनकी मिट्टी की सेहत यानी सॉयल हेल्थ की जानकारी एप से दी जाएगी। कृषि विभाग की सॉयल टेस्टिंग लैब किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड जारी कर रही है। इन सैंपल की रिपोर्ट के अनुसार हिसार की मिट्टी में आर्गेनिक कार्बन की मात्रा 0.4 है, जो कम है। अच्छी पैदावार के लिए इसका 0.7 प्रतिशत होना आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार, जिले के खेतोें की मिट्टी में नाइट्रोजन पूरी है, लेकिन ऑर्गेनिक कार्बन कम होने से फसलों के उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। पराली जलाने के साथ ही अंधाधुंध पेस्टीसाइड से भी मिट्टी को अधिक नुकसान हो रहा है।
आज मृदा दिवस है। इसको लेकर सॉयल टेस्टिंग ऑफिसर सतबीर बेडवाल से बात की तो उन्होंने बताया कहा कि सॉयल हेल्थ कार्ड के जरिये किसानों को उनकी मिट्टी की सेहत से अवगत कराया जा चुका है। उनको इसे समझाने के लिए अब एप के माध्यम से जानकारी देंगे। 2015 से 2017 में 7.5 लाख सॉयल हेल्थ कार्ड बन गए थे। कोविड के कारण पिछले एक साल में सैंपल नहीं लिए जा सके थे।
पराली जलाने से नष्ट हो जाते हैं सल्फर, नाइट्रोजन
गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय से पर्यावरण विभाग के पूर्व प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने बताया कि पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद सल्फर, नाइट्रोजन और 85 प्रतिशत नष्ट हो जाते हैं। मिट्टी की जल धारणा क्षमता भी कम हो जाती है। जिससे सिंचाई ज्यादा करनी पड़ती हैं। खाद भी ज्यादा डालनी पड़ती है। जिस जमीन पर आग लगाई जाती है, उसकी ऊपरी परत खराब हो जाती है। हरियाणा में 25 लाख हेक्टेयर में धान बोया जाता है। हर साल प्रदेश में करीब 90 लाख टन अवशेष किसान खेतों में जलाता है। एक हेक्टेयर में डेढ़ टन के करीब अवशेष निकलता है। इस पराली को जलाने की बजाय जमीन में गाड़ दें और केंचुए डालकर खाद बना लें। इस जैविक खाद से अगली फसल के लिए भी खेत तैयार रहेंगे। जैसे आदमी की चमड़ी जल जाने पर शरीर काम नहीं करता। इसी तरह धरती का ऊपरी हिस्सा अगर जलेगा तो वह बंजर हो जाती है।
खेती में अच्छी पैदावर के लिए जरूरी मिट्टी की जांच
मिट्टी की जांच करने से यह पता लग जाता है कि इसमें कौन-कौन से न्यूट्रिशन है, कौन सी मिट्टी में कौन से न्यूट्रिशन की कमी है। इस कमी को जानकर विभिन्न खाद के माध्यम से उसे पूरा किया जा सकता है। इसलिए मिट्टी की जांच अवश्य करवा लेनी चाहिए। ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसमें फास्फोरस कम है, पोटेशियम कम है या नाइट्रोजन कम है। मिट्टी में यह चीजें होनी चाहिएं। जमीन में कार्बन की मात्रा से जमीन की उर्वरा शक्ति का पता लगाया जा सकता है। ऑर्गेनिक कार्बन 0.75 प्रतिशत होनी चाहिए, लेकिन हरियाणा में सिर्फ यमुनानगर में जमीन में ऑर्गेनिक कार्बन 0.75 प्रतिशत है। संवाद