हिसार। जिले के सबसे बड़े नागरिक अस्पताल में जरूरी दवाइयां खत्म हो चुकी हैं। इस कारण मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही है। दवाइयों की पूर्ति के लिए राज्यसभा सांसद डॉक्टर सुभाष चंद्रा ने अपने सांसद कोटे से बीस लाख रुपये देने की हामी भरी थी लेकिन नियमों के हिसाब से सांसद कोटे से दवाइयां नहीं खरीद सकते। इस विषय की सोशल मीडिया पर काफी चर्चा चल रही है कि जब सांसद कोटे से दवाइयां खरीद नहीं सकते तो राज्यसभा सांसद ने अस्पताल प्रशासन को कोटे से बीस लाख रुपये देने का एलान क्यों किया।
नागरिक अस्पताल के पीएमओ ऑफिस की तरफ से 4 अप्रैल को राज्यसभा सांसद को एक पत्र लिखा गया। जिसमें कहा गया है कि राज्यसभा सांसद ने तीन अप्रैल को नागरिक अस्पताल का दौरा किया था। उस समय दवाइयों की कमी का मामला सामने आया था। दवाइयों को समस्या को दूर करने के लिए सांसद कोटे से बीस लाख रुपये देने की घोषणा की थी। इससे कि जनहित को देखते हुए मरीजों को सामना न करना पड़े।
इन 5 प्रकार की दवाइयों का पत्र में किया जिक्र
पत्र से माध्यम से पांच प्रकार की दवाइयों का जिक्र किया गया है जो कि वेयर हाउस में भी नहीं है। पहला ये कि इंजेक्शन अलबुमिन यह उन मरीजों के काम आता है जिनके शरीर में प्रोटीन की कमी होती है। ऑपरेशन के बाद कई रोगी लंबे समय तक खाना नहीं खा पाते, उन्हें इस इंजेक्शन के जरिये ही प्रोटीन देना पड़ता है। इसी तरह गुर्दा रोगियों, लीवर फेल्योर समेत कैंसर जैसे रोगों में इसकी जरूरत होती है। दूसरा इंजेक्शन एंटी डी, यह उन महिलाओं को लगाया जाता है जिनके गर्भ में पल रहे बच्चे में खून की कमी होती है। तीसरा है इंजेक्शन मेरोपेनेम यह उन मरीजों को लगाया जाता है जिनको दिमागी बुखार है या फिर यूरिन में इंफेक्शन है। चौथा है रेबिज का टीका और पांचवां है कुछ सिंरिंज जो कि अस्पताल परिसर में नहीं है।
बच्चों को बुखार में देने वाली दवा नहीं
नागरिक अस्पताल में पिछले कुछ समय से मरीजों को सामान्य दवाइयां भी नहीं मिल रही। मजबूरन मरीजों को महंगें दामों पर बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही है। मौसम में बदलवा के साथ साथ मौसमी बीमारियों की के मरीज बढ़ रहे है। ज्यादा केस बुखार के सामने आ रहे है। हालात ये है कि सरकारी अस्पताल में बच्चों को बुखार में पीने के लिए देने वाली दवा तक नहीं है। इसके अलावा दर्द में बच्चों को देने वाली दवा भी नहीं है।
बाहर से लेनी पड़ रही आंखों की दवाइयां
अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी अनुसार नागरिक अस्पताल में छह प्रकार की आंखों की दवाइयां मिलती है, लेकिन अब एक ही प्रकार की दवा मिल रही है। बाकी दवाइयां मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रही है। इक अलावा गर्भवती महिलाओं को उल्टी रोकने के लिए दिए जाने वाली दवा भी खत्म है। तीन प्रकार की एंटीबाइटिक दवाइयां भी नहीं है जिसकी एक कीट बनाकर मरीजों को दी जाती है। एलर्जी के समय शरीर पर लगाने वाला एक लोशन भी मरीजों को नहीं मिल रहा है।
सोशल मीडिया पर छा रहा मुद्दा...
नागरिक अस्पताल के बॉयोलॉजिस्ट डॉ. रमेश पूनिया ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली हुई है जो वॉयरल हो रही है। उसमें लिखा है कि हरियाणा को बने हुए 55 साल हो चुके हैं। अजीब विडंबना है दोस्तों हरियाणा बनने से 9 साल पहले 1957 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री स्वर्गीय चौधरी सूरजमल ने हिसार के सिविल हॉस्पिटल की नींव रखी थी यह उस वक्त 500 बेड का अस्पताल बनाया गया था और यहां बठिंडा तक का रोगी अपना इलाज कराने आता था और आज हालात यह है कि अब 2 दिन पहले रविवार को जब राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्रा ने इस अस्पताल का दौरा करने आए तो वहां पर मौजूद चिकित्सकों ने बताया कि हमारे पास दवाइयां ही नहीं है और दवाइयों का बड़ा भारी टोटा है हालांकि उन्होंने तुरंत 20 लाख रुपये दवाइयों के लिए लिए एमपी लैड से देने का आश्वासन दिया लेकिन कब ग्रांट आएगी और कब वह दवाइयां आएगी यह तो वह बात हो गई कि कब नौ मन तेल होगा और कब राधा नाचेगी क्योंकि एमपी लैड के अंदर दवाइयां कवर नहीं होती। यह हालात तब है जब हिसार निजी अस्पतालों का मेडिकल हब बन चुका है। हिसार शहर में एक उपमुख्यमंत्री, एक स्थानीय निकाय मंत्री, एक श्रम एवं रोजगार मंत्री, एक सांसद, एक डिप्टी स्पीकर और दो राज्यसभा सांसद वर्तमान में मौजूद है उसके बावजूद ये हालत है।
राज्यसभा सांसद डॉक्टर सुभाष चंद्रा ने तीन अप्रैल को अस्पताल परिसर क दौरा किया था। उस समय उन्होंने कहा कि कोई परेशानी तो नहीं, उनसे कहा कि अस्पताल में कुछ दवाइयां नहीं है जिसके कारण मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने समस्या को दूर करने के लिए बीस लाख रुपये देने की घोषणा की थी। मुझे नहीं पता कि सांसद कोटे से दवाइयों के लिए सांसद रुपये दे सकता है नहीं। - अनीता बंसल, कार्यकारी, पीएमओ, नागरिक अस्पताल, हिसार