हिसार। शवासन अब निद्रासन के नाम से जाना जाएगा। प्रदेश सरकार ने इस बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में शवासन मुद्रा का उच्चारण नहीं करने पर जोर दिया है। इस संबंध में आयुष विभाग से माैखिक तौर पर आदेश डीपीई-पीटीआई व अन्य अधिकारियों को दिए गए हैं।
शवासन मुद्रा को शव मुद्रा के नाम से भी जाना जाता है। इस पर योग आचार्यों ने शवासन मुद्रा के नाम को बदलने का सरकार से आग्रह किया था। योग आचार्यों का तर्क था कि शवासन अर्थात शव मुद्रा मृत्यु का प्रतीक है, जिसको लेकर योगाचार्यों ने आपत्ति भी दर्ज कराई थी। इस पर संज्ञान लेते हुए सरकार ने निद्रासन शब्द का इस्तेमाल करने की अपील की है। खास बात है कि पहली बार जिले के सरकारी-निजी स्कूलों के 34 हजार विद्यार्थी और 600 गुरुजी 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर योग करेंगे। इसके लिए 600 गुरुजी को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित कर दिया गया है, जिनमें डीपीई-पीटीआई व अन्य शिक्षक शामिल हैं।
गुरुजी को तीन दिन की दी गई ट्रेनिंग
शिक्षा विभाग के अधिकारी की मानें तो 26 से 28 मई को महाबीर स्टेडियम स्थित जूडो हॉल में शिक्षा विभाग से जुड़े 600 पीटीआई-डीपीई को ट्रेनिंग दी गई थी। इसमें स्वास्थ्य विभाग के आयुर्वेदिक शाखा के चिकित्सक व आचार्य भी शामिल हुए। अब ये गुरुजी स्कूलों में जाकर योग के टिप्स देंगे।
अब आगे क्या
12 से 14 जून तक जिला व खंड स्तर पर प्रशासनिक सहित समस्त विभागों के अधिकारियों को योग के टिप्स दिए जाएंगे। खासतौर पर स्काउट, कैडेट्स, नेहरू युवा केंद्र स्टाफ सहित अन्य शाखाओं के लोग शामिल होंगे। आयुष विभाग के योग विशेषज्ञ, योग समितियां, खेल विभाग से जुड़े कोच भी शामिल होंगे।
16 से 18 जून तक जिला स्तर पर मंत्री, सांसद, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी व अन्य शाखाओं से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों को आयुष विभाग से योगाचार्य योगासन की विभिन्न मुद्राओं के बारे में बताएंगे।
20 जून को सुबह 7 बजे से 8 बजे तक जिले में मुख्य कार्यक्रम के लिए पायलट रिहर्सल की जाएगी। योगा-मैराथन कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। इनमें स्कूल, कॉलेज, गुरुकुल, विश्वविद्यालयों, योग संस्थानों, पुलिस सहित अन्य शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी योग स्लोगन के बैनर लेकर रैली निकालेंगे।
- 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर जिला व खंड स्तर पर योग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इनमें उपायुक्त संग, डीईओ, डीईईओ, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी के अलावा विभिन्न शाखाओं के मुखिया, स्टाफ के साथ योग करेंगे।
ये है शवासन मुद्रा
योग में शवासन मुद्रा को शव मुद्रा भी कहा जाता है। यह एक विश्राम आसन है, जो योग सत्र के अंत में शरीर और मन को आराम देने के लिए किया जाता है। यह आसन पीठ के बल लेटकर, हाथ और पैर सीधे रखकर किया जाता है।
योग में शवासन मुद्रा को अब योग निद्रासन के नाम से जाना जाएगा। इस संबंध में आयुष विभाग से माैखिक तौर पर आदेश जारी हुए है। अब हम निद्रासन के नाम से ही इसे प्रसारित करेंगे। ट्रेनिंग में इस योग मुद्रा के नाम बदलने पर जोर दिया गया है। खास बात है कि पहली बार जिले के सरकारी-निजी स्कूलों के 34 हजार विद्यार्थी और 600 गुरुजी 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर योग करेंगे।
- कुलदीप मलिक, असिस्टेंट एजुकेशन ऑफिसर, स्कूली खेल शाखा, हिसार।