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Hisar News: राखीगढ़ी से धौलावीरा तक सभ्यता के मिले साझे निशान, अंतरराष्ट्रीय राखीगढ़ी महोत्सव में सरस्वती-सिंधु सभ्यता पर कॉन्फ्रेंस

Fri, 23 Oct 2026 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
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रखीगढ़ी में खोदाई में मिले अवशेष। अमरउजाला
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नारनौंद। हड़प्पाकालीन सभ्यता के अलग-अलग केंद्रों में मकानों, मिट्टी के बर्तनों, मुहरों और नगर निर्माण से जुड़ी समानताएं प्राचीन समाज की जीवनशैली को समझने का आधार बन रही हैं। अंतरराष्ट्रीय राखीगढ़ी महोत्सव के तहत वीरवार को राखीगढ़ी संग्रहालय में आयोजित सरस्वती-सिंधु सभ्यता कॉन्फ्रेंस में पुरातत्वविदों ने धौलावीरा, बनावली और राखीगढ़ी के पुरातात्विक प्रमाणों पर चर्चा की।
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इस दौरान प्राचीन जल प्रबंधन व्यवस्था और साइट-7 में मिले मानव कंकालों से जुड़े शोध पहलुओं पर भी विचार साझा किए। कॉन्फ्रेंस में पद्मश्री डॉ. आरएस बिष्ट, डॉ. संजय मंजुल, डॉ. मनोज सक्सेना और जीवन खरकवाल ने अपने शोध और पुरातात्विक अनुभव प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों ने बताया कि विभिन्न स्थलों से मिले अवशेषों का तुलनात्मक अध्ययन सभ्यता की बसावट, नगर निर्माण और सामाजिक जीवन को समझने में महत्वपूर्ण है।
मकानों और मुहरों से समझी सभ्यता की विशेषताएं
पद्मश्री डॉ. आरएस बिष्ट ने धौलावीरा और बनावली जैसे पुरातात्विक स्थलों की विशेषताओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि मकानों, मिट्टी के बर्तनों, मुहरों और नगर निर्माण से जुड़े अवशेषों के अध्ययन से हड़प्पाकालीन केंद्रों के बीच समानताओं और उनकी विशिष्टताओं का पता चलता है। इन प्रमाणों से तत्कालीन समाज की संरचना और जीवनशैली को समझने में मदद मिलती है।
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डॉ. संजय मंजुल ने राखीगढ़ी में खोदाई के दौरान मिले अवशेषों और जल भंडारण से जुड़ी संरचनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये प्रमाण प्राचीन बस्ती की बसावट और पानी के प्रबंधन की व्यवस्था को समझने में अहम हैं। मानव कंकालों के आसपास मिली दीवारों के अवशेष भी शोध की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
साइट-7 में आगे भी होगी खोदाई
डॉ. मनोज सक्सेना ने राखीगढ़ी की साइट नंबर-7 में मिले मानव कंकालों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में आगे भी खोदाई की जाएगी। कंकालों और उनके साथ मिले अन्य अवशेषों के वैज्ञानिक अध्ययन से प्राचीन लोगों की जीवनशैली और दफनाने की परंपराओं के बारे में जानकारी मिल सकती है। कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने पुरातात्विक प्रमाणों के वैज्ञानिक अध्ययन और विभिन्न स्थलों की आपसी तुलना पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी में अभी शोध की व्यापक संभावनाएं हैं। नए अध्ययनों से सरस्वती-सिंधु सभ्यता के इतिहास और सामाजिक जीवन को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
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