हरियाणा के युुवाओं का रुझान एग्रीकल्चर की पढ़ाई में बढ़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ हरियाणा की एकमात्र एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी एचएयू में सीटें घट रही हैं। वजह, द्रोणाचार्यों की कमी। इसी कमी के कारण एचएयूू के कौल स्थित कॉलेज की सीटें भी घटा दी गईं। कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर में चार वर्षीय बीएससी एग्रीकल्चर की सीटें इस बार केवल इसलिए घटा दी गईं, क्योंकि विभाग में प्रोफेसरों की कमी हो गई थी। बीएससी एग्रीकल्चर की कुल 80 सीटों को घटाकर 50 कर दिया गया है, जिन पर काउंसिलिंग हो चुकी है।
पिछले कुछ समय से एग्रीकल्चर के क्षेत्र में विद्यार्थियों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि इस बार बीएससी एग्रीकल्चर की 50 सीटों के लिए ही प्रदेश भर से 13 हजार 426 आवेदन आए थे और 10 हजार 148 विद्यार्थियों ने प्रवेश परीक्षा दी थी।
80 सीटों के थे दो सेक्सन
पिछले साल चार वर्षीय बीएससी एग्रीकल्चर के लिए 80 सीटें थीं, जिनके लिए 40-40 विद्यार्थियों के दो सेक्सन बनाए हुए थे, लेकिन प्रोफेसरों की कमी होने के कारण सीटें घटाकर 50 कर दी गईं और एक ही सेक्सन बना दिया गया। वहीं कुरुक्षेत्र के कौल स्थित कॉलेज की सीटें भी 50 प्रतिशत घटाकर 50 से 25 कर दी गईं।
एक साल में 30 से अधिक रिटायरमेंट
एचएयू में रिटायरमेंट की दर वर्ष दर वर्ष बढ़ रही है। पिछले एक साल में केवल कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर में ही 30 से अधिक रिटायरमेंट हो चुुकी हैं। निकट भविष्य में भी कई रिटायरमेंट होनी है।
फैकल्टी की कमी के कारण हमें सीटें घटानी पड़ी। पिछले चार सालों से कोई भी नई नियुक्ति नहीं हुई है, जबकि रिटायरमेंट दर हर साल बढ़ी है। हमने सरकार से नियुक्तियों को लेकर रिक्वेस्ट की हुई है। नियुक्तियां होते ही सीटें बढ़ा दी जाएंगी।
- डॉ. एमएस दहिया, रजिस्ट्रार एचएयू हिसार