बास। तिरंगे में लिपटे बलिदानी पवन का पार्थिव शव देख मां सावित्री और पत्नी रितु का कलेजा फट पड़ा। ताबूत पर माथा रखकर शहीद पति को नमन करती पत्नी के आंसू देख परिवार के लोगों में कोहराम मच गया। सांत्वना देने जुटीं महिलाएं भी भावुक हो उठीं। दोनों बेटों सौम्य (18) और विनय (16) को आस-पड़ोस के लोग संभाल रहे थे। हर कोई पवन की सादगी, मिलनसारिता और बहादुरी की चर्चा कर रहा था। लोग कह रहे थे कि आज बेटा हमारे बीच नहीं है पर वह सदा के लिए अमर हो गया है।
अरुणाचल प्रदेश में तैनात रहे पवन सिंधु को सेना में रहे दादा केहर सिंह और ताऊ सूबेदार कर्ण सिंह से भारतीय सेना में जाने की प्रेरणा मिली। ग्रामीणों ने बताया कि वह 13 मार्च को छुट्टी पर गांव आए थे और 27 अप्रैल को ड्यूटी पर लौट गए। इस बार दिवाली सरहद पर ही मनाई थी। आखिरी बार 29 अक्तूबर को बड़े बेटे सौम्य से दो मिनट फोन पर बात की थी। संवाद