सिटी थाना पुलिस ने रोड सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (आरएसओ) के सदस्य रहे विनय सोनी और केपी सिंह को दो दिन के रिमांड पर लिया है। पुलिस रिमांड के दौरान दोनों अभियुक्तों से 700 रुपये लेकर बेचे गए आई कार्ड अथवा स्टीकर बरामद करेगी। इसके अलावा ऑफिस से उठाए गए डॉक्यूमेंट, मुहर बरामद करेगी। पुलिस ने दोनों को शनिवार को कोर्ट में पेश किया था।
अनाजमंडी चौकी इंचार्ज चांदीराम ने बताया कि आरएसओ सदस्य रहे विनय सोनी व केपी सिंह को दो दिन के रिमांड पर लिया गया है। दोनों पर जो आरोप लगे हैं उनके हिसाब से इनसे स्टीकर व अन्य डॉक्यूमेंट बरामद करने हैं।
यह था मामला
बता दें कि विनय सोनी व केपी सिंह के खिलाफ सिटी पुलिस ने धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का केस दर्ज किया है। आरोप है कि इन्होंने रुपये लेकर आरएसओ के 88 स्टीकर बेच दिए। एक स्टीकर के बदले 700 रुपये वसूल रहे थे। आरएसओ के प्रधान सुदामा अग्रवाल ने इस बारे एसपी को शिकायत दी थी। दोनों को पुलिस ने थाने भी बुलाया था। मामला रफा दफा करने के लिए दोनों ने माफीनामा लिखकर पुलिस से मिलीभगत कर पिंड छुड़ाने का प्रयास किया था। मगर मामला मीडिया तक पहुंच गया तो पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। साथ ही दूसरे सामाजिक संस्थाओं का भी पुलिस पर दबाव बढ़ गया।
18 लोगों को बनाया था सदस्य
आरएसओ के प्रधान सुदामा अग्रवाल ने एसपी अश्विन शैणवी को पत्र लिखकर आरएसओ के चार सदस्यों पर कार्रवाई की मांग की थी। एसपी ने डीएसपी परमजीत समोता को जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। जांच के बाद केस दर्ज किया है। सुदामा अग्रवाला ने बताया कि देव नामक युवक ने उन्हें शिकायत दी थी, जिसमें उन्होंने बताया कि आरएसओ के सदस्यों ने उससे 700 रुपये लिए। इसके बदले उसे आरएसओ का स्टीकर देने का वादा किया था। आरएसओ से जुड़े रहे इन लोगों ने कहा था कि इस स्टीकर को लगाने के बाद उन्हें पुलिस कहीं नहीं रोकेगी। देव की शिकायत के अनुसार उसे स्टीकर नहीं दिया गया। स्टीकर बेचे जाने के आरोप मिलने पर प्रधान सुदामा अग्रवाल ने 23 अगस्त को सीनियर सिटीजन क्लब में बैठक बुलाई थी, जिसमें कोषाध्यक्ष केपी सिंह, प्रेस सचिव विनय सोनी और दो अन्य से इस्तीफा ले लिया था।
चलाते थे बिना रजिस्ट्रेशन की गाड़ी
शिकायत में सुदामा अग्रवाल ने यह भी बताया था कि ये दोनों सदस्य आरएसओ के एवज में खूब कानून की धज्जियां उड़ाते थे। डेढ़ दो साल से उन्होंने एक गाड़ी ले रखी थी जिसके अस्थायी नंबर थे। आरएसओ का स्टीकर लगाकर ये इसे सरेआम सड़कों पर दौड़ाते थे। दूसरों को भी इस तरह की सपने दिखाकर स्टीकर बेचते थे कि ये आई कार्ड मिलने के बाद तुम्हें पुलिस नहीं रोकेगी।