हिसार। नए साल में शहरवासियों को बिजली, पेयजल और सीवर जैसी बुनियादी सुविधाओं में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। शहर में कई नई परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं, जिनके तहत सेक्टर 16-17 में 33 केवी सब स्टेशन बनकर तैयार होगा, वहीं शहर की करीब 60 किलोमीटर पुरानी सीवर लाइनों को बदला जाएगा।
बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सेक्टर 16-17 में इसी माह 33 केवी सब स्टेशन का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। वर्ष 2021 में यहां जीआईएस सब स्टेशन के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई थी, लेकिन करीब तीन वर्षों तक यह परियोजना फाइलों में ही अटकी रही। अब यहां सामान्य 33 केवी सब स्टेशन का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। लगभग छह करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस सब स्टेशन को एक वर्ष में पूरा करने की योजना है।
इस सब स्टेशन के चालू होने से सेक्टर-13, सेक्टर-15, सेक्टर-16, राजगढ़ रोड सहित आसपास की आबादी को बिजली कटों से राहत मिलेगी। इसके अलावा नए साल में एचएयू और सेक्टर-33 में भी 33 केवी सब स्टेशन का निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। वहीं चंदन नगर में 33 केवी और चिकनवास में 132 केवी सब स्टेशन के निर्माण की भी उम्मीद जताई जा रही है। इस वर्ष 132 केवी बीड़ और 132 केवी भोजराज सब स्टेशन बनकर तैयार हो चुके हैं।
अमृत-2 के तहत शहर की सीवर व्यवस्था होगी मजबूत
अमृत-2 योजना के तहत शहर के लिए 236 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है। इसके अंतर्गत पुरानी ब्रिक वाली सीवर लाइनों के मजबूतीकरण का कार्य चल रहा है। उम्मीद है कि अगले वर्ष इसका अधिकांश कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके अलावा शहर में पुरानी सीवर लाइनों को बदला जाएगा और नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण भी किया जाना है। इन कार्यों की शुरुआत अगले साल होने की संभावना है।
गंगवा में महाग्राम प्रोजेक्ट अधूरा
वहीं गांव गंगवा में चल रहा महाग्राम प्रोजेक्ट इस वर्ष पूरा नहीं हो सका। गंगवा जिला का पहला गांव है, जिसे महाग्राम योजना के तहत चयनित किया गया था। इस योजना का शिलान्यास फरवरी 2024 में कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा ने किया था। प्रोजेक्ट की कुल लागत 72.74 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के तहत गांव में सीवर लाइन, पेयजल लाइन, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाना है। इस कार्य को 31 जुलाई 2025 तक पूरा किया जाना था, लेकिन एजेंसी समय पर कार्य पूरा नहीं कर पाई और दिसंबर तक की मोहलत मांगी गई। हालांकि दिसंबर तक भी काम पूरा नहीं हो सका। अब यह परियोजना अगले वर्ष ही पूरी होने की संभावना है। इसके अलावा नगर निगम की ओर से सातरोड क्षेत्र में अमृत योजना के तहत चल रहा कार्य भी इस वर्ष पूरा नहीं हो सका।