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Hisar News: हर माह 30 करोड़ रुपये का जीएसटी दिलाने वाली राजगुरु मार्केट में पार्किंग तक नहीं

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हिसार। शहर की सबसे बड़ी राजगुरु मार्केट सहित आसपास की करीब आधा दर्जन से ज्यादा मार्केट के व्यापारी हर माह जीएसटी के रूप में सरकार को करीब 30 करोड़ रुपये का राजस्व दे रहे हैं। बावजूद इसके मार्केट में सुविधा की कमी हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इतनी बड़ी मार्केट में जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या ग्राहक आते हैं, वहां पार्किंग की सुविधा तक नहीं है। मजबूरी में वाहन सड़कों पर ही खड़े करने पड़ रहे हैं, जिससे मार्केट में अव्यवस्था फैली है। अतिक्रमण के कारण भी जाम की समस्या से दो-चार होना पड़ता है। मार्केट के व्यापारियों की मानें तो मार्केट में सफाई व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं है। सड़कों पर बेसहारा पशु घूमते रहते हैं। साथ ही लटकती तारों की वजह से हादसे की संभावना भी बनी रहती है।
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बता दें कि वर्ष 1970-71 में राजगुरु मार्केट में दुकानें अलॉट की गईं थी। इसमें करीब 450 दुकानें हैं। इसके अलावा इस मार्केट के साथ न्यू राजगुरु मार्केट, पूजा मार्केट, चौधरी मार्केट, आर्य मंदिर मार्केट, लाला लाजपतराय मार्केट, तेलियान पुल मार्केट बसी हुई है। इनमें भी करीब 400 के लगभग दुकानें हैं।
जाम की रहती है स्थिति
- मुख्यमंत्री ने मार्केट के लिए मल्टी स्टोरी पार्किंग की घोषणा की थी। मगर आज तक यह पार्किंग नहीं बनी। पार्किंग व्यवस्था न होने से सड़कों पर वाहन खड़े करने पड़ रहे हैं। - सुरेंद्र बजाज
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- मार्केट की सफाई व्यवस्था सही नहीं है। मार्केट में जगह-जगह कचरा पड़ रहता है। प्रतिदिन यहां सफाई भी नहीं होती। - दर्शन खुराना
- मार्केट में जगह-जगह रेहड़ियों के खड़े होने से जाम लग जाता है। इसके अलावा मार्केट में अतिक्रमण की भी समस्या है। - शुभम वलेचा
- मार्केट में बेसहारा पशु घूमते रहते हैं, जिनके कारण हादसे की संभावना बनी रहती है। इन पशुओं से निजात दिलाई जाए। - हरीश
- मार्केट में बिजली के तारे लटके पड़े हैं। जगह-जगह इन तारों का जाल बना हुआ है, जिस कारण हादसे की संभावना बनी रहती है। - वैभव चौधरी
दुकानदारों की मांग-बिना जुर्माने के करवाई जाए कन्वींस डीड
राजगुरु मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन ने सरकार से बिना जुर्माने के उनकी दुकानों की कन्वींस डीड करवाने की मांग की है। एसोसिएशन के मुताबिक जब उन्होंने दुकानें खरीदी थी तो उस कन्वींस डीड की कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई थी और तीन बाद दुकान बेचने का प्रावधान था। मगर उसकी भी समय सीमा फिक्स नहीं थी। आज से करीब 10 साल पहले तक दुकानों की कन्वींस डीड हो रही थी। मगर अब अधिकारी कन्वींस डीड करने से मना कर रहे हैं। कन्वींस डीड न होने से व्यापारी इन दुकानों को न ही बेच सकते और न ही अपने बच्चों के नाम करवा सकते हैं। एसोसिएशन ने बताया कि वह इस मांग को लेकर जल्द ही मुख्यमंत्री को मांग पत्र भी सौंपेंगे।
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