पुराने हिसार जिले में पहली बार सिरसा, हांसी, फतेहाबाद, भिवानी और हिसार में सार्वजनिक तौर पर तोड़फोड़ की गई थी। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ क्रांतिकारियों में आक्रोश था। नेताओं की गिरफ्तारी के बाद खुद अपनी गिरफ्तारी को लेकर पुलिस थानों में पहुंच गए थे। रिपोर्ट के अनुसार उस समय 5200 लोगों ने थानों में जाकर गिरफ्तारियां दी थी। बच्चे गांव-गांव में जाकर उनके खाने-पीने का व्यवस्था करते थे और जेलों में देकर आते थे।
जिले के क्रांतिकारी बड़े नेताओं को अंग्रेजी हुकूमत ने गिरफ्तार कर लिया था। उसके बाद भारत छोड़ो आंदोलन को आगे चलाने और लोगों तक पहुंचाने के लिए बाकी बचे नेताओं ने जिम्मेदारी ली। वे सभी भूमिगत हो गए और दिन में किसान खेतों में और दुकानदार अपनी दुकानों में बैठते थे ताकि अंग्रेजों को शक ना हो। रात के समय भूमिगत नेता गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क करते और क्रांति के बारे में जागरूक करते। नेताओं ने दिन के समय बैठक करना बंद कर दिया था। अंग्रेजी हुकूमत भूमिगत नेताओं को कभी पकड़ नहीं सकी और भूमिगत नेता अपने इरादों में कामयाब भी हुए।
इतिहासकार बताते हैं कि भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब पुलिस क्रांतिकारियों को पकड़ने के लिए सिसाय गांव में गई तो पुलिस वालों ने जिस किसी से भी नाम पूछा तो उसने अपना नाम दौलतराम बताया। पुलिस ने उस दौरान 72 लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार किए गए सभी 72 लोगों ने अपना नाम दौलत और पिता का नाम गांधी बताया था। पुलिस भी हैरान थी, बाद में सभी को छोड़ दिया गया।
बलवंत राय तायल को अंग्रेजी शासन ने हिसार जिले के 20 नेताओं के साथ गिरफ्तार किया था। कुछ दिनों के बाद बलवंत राय तायल को छोड़कर सभी को पुलिस ने आजाद कर दिया था।। बलवंत राय तायल को न छोड़ने पर इंग्लैंड की पार्लियामेंट में यह मुद्दा गूंजा था और वहां से तायल को छोड़ने के आदेश हुए थे। दो दिन के बाद पुलिस ने बलवंत राय तायल को छोड़ दिया था।