हांसी। नगर परिषद ने सरकारी भवनों को लंबित संपत्ति कर के लिए बिल भेजने शुरू कर दिए हैं। साथ ही उन्हें कर जमा करवाने के लिए भी कहा जा रहा है। सबसे ज्यादा संपत्ति कर टेलीफोन एक्सचेंज का 89 लाख, जनस्वास्थ्य विभाग का 55 लाख, बस स्टैंड का 33 लाख, रेलवे स्टेशन का 20 लाख रुपये का कर बकाया है।
नगर परिषद के रिकॉर्ड के अनुसार शहर में 62 सरकारी भवन प्रदेश सरकार के व 5 सरकारी भवन केंद्र सरकार के हैं। प्रदेश सरकार के कई सरकारी भवनों पर कर में 50 प्रतिशत तक की भी छूट है। इसमें से अधिकांश सरकारी भवनों के कर कई वर्षों से लंबित हैं। सरकारी भवनों के अधिकारी कर जमा करवाने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं। अब इन सबको उनके लंबित कर के लिए नोटिस भेजा जा रहा है। साथ ही अधिकारियों को फोन पर कर जमा करवाने के लिए कहा जा रहा है। नगर परिषद के अधिकारियों ने अपनी आय बढ़ाने के लिए ऐसा किया है। करीब 15 विभागों को उनके विभिन्न सरकारी भवनों के लिए बिल भेजे गए हैं। नगर परिषद की तरफ से हर वर्ष सरकारी भवनों को नोटिस दिए जाते हैं, लेकिन सरकार विभागों की तरफ से संपत्ति कर भरवाने में कोई रूचि नहीं दिखाई जाती है। नगर परिषद अक्सर प्रॉपर्टी टैक्स जमा करवाने में फिसड्डी रहती है।
इतना कर है लंबित
बिजली निगम के रेलवे रोड स्थित कार्यालय का 7.34 लाख रुपये, भिवानी रोड स्थित पावर हाउस व बिजली निगम कार्यालय का 5.12 लाख रुपये, वन विभाग का 3.98 लाख रुपये, दमकल विभाग का 4.99 लाख रुपये, खंड विकास एवं पंचायत कार्यालय का 5.87 लाख रुपये, हरियाणा पुलिस के विभिन्न भवन व चेक पोस्ट का करीब 2 लाख रुपये, कृषि विभाग के विभागों का 12 लाख रुपये कर लंबित है। लघु सचिवालय का 26.38 लाख रुपये, बस स्टैंड का 33.17 लाख रुपये, जनस्वास्थ्य विभाग का 55 लाख रुपये, रेलवे स्टेशन का 20 लाख रुपये का कर लंबित है।
म्युनिसिपल टैक्स है लंबित
बीते दिनों जारी किए गए बजट के ब्योरे के अनुसार नगर परिषद को वर्ष 2024-25 में बिजली बिलों पर लगने वाली म्युनिसिपल टैक्स से 2.20 करोड़ रुपये की कमाई होने का अनुमान था। बिजली बिलों में म्युनिसिपल टैक्स जुड़कर आता है। आमजन बिजली बिलों में यह राशि बिजली निगम को अदा करता है, जिसमें से नगर परिषद को एक रुपया भी नहीं मिला। नगर परिषद का यह कर भी लंबित है। नगर परिषद को इस वित्त वर्ष में संपत्ति कर से साढ़े 3 करोड़ रुपये की कमाई होने का अनुमान था, लेकिन नगर परिषद एक करोड़ रुपये ही कर जमा करवा पाई है।
लंबित संपत्ति कर वाले सरकारी विभागों को बिल दिया गया है। संबंधित अधिकारियों को कर जमा करवाने के लिए भी कहा है। कई विभागों पर लंबे समय से कर नहीं भरा है। -
डॉ. सुरेश चौहान, कार्यकारी अधिकारी।