हिसार। डाबड़ा चौक के पास स्थित निजी अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीज के परिजनों से 48 हजार रुपये बिल से ज्यादा वसूले जाने का मामला सामने आया है। परिवार को एक लाख चार हजार 95 रुपये का बिल थमाया गया। इस पर तीमारदारों ने हंगामा कर दिया। परिवार ने नागरिक अस्पताल के जीव वैज्ञानिक डॉ. रमेश पूनिया से इस बिल के बारे में बातचीत की। डॉ. रमेश पूनिया ने निजी अस्पताल से बात की तो अस्पताल प्रशासन ने 36 हजार रुपये चेक से लौटा दिए। परिजनों ने मामले की शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों से भी करने की बात कही है।
भिवानी निवासी 55 वर्षीय महिला संतोष को कोरोना संक्रमित होने पर डाबड़ा चौक के पास स्थित निजी अस्पताल में 16 मई को दाखिल करवाया गया था। इस मरीज को 22 मई को डिस्चार्ज किया गया था। अस्पताल प्रशासन ने कुल एक लाख 4 हजार 95 रुपये का बिल बनाया। जिसमें परिवार के लोग एक लाख रुपये जमा करा चुके थे। परिजनों को किसी ने डॉ. रमेश पूनिया का नंबर दिया। मरीज के परिजनों ने जब डॉ. रमेश पूनिया से बातचीत की तो डॉ. रमेश पूनिया ने कहा कि अस्पताल ने अधिक बिल बनाया है। छह दिन का अधिकतम बिल 68 हजार रुपये ही होना चाहिए। डॉ. रमेश ने बताया कि अस्पताल प्रशासन ने बेड के निर्धारित रेट के अलावा दवाइयों व टेस्ट के पैसे अलग से जोड़ रखे थे। यह पैसे निर्धारित बेड रेट में ही शामिल होते हैं। डॉ. रमेश पूनिया के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल प्रशासन ने 36 हजार रुपये का चेक परिजनों को वापस कर दिए।
अधिक बिल लिया था
निजी अस्पताल के कर्मचारियों ने मरीज के परिजनों से अधिक बिल लिया था। मैंने हस्तक्षेप किया तो पीड़ित परिवार को 36 हजार रुपये लौटा दिए गए हैं।
- डॉ. रमेश पूनिया, जीव वैज्ञानिक, नागरिक अस्पताल, हिसार।
कमेटी क्या कर रही है
अस्पताल प्रशासन ने रेट लिस्ट तो लगाई लेकिन उसमें यह नहीं लिखा कि दस हजार रुपये बेड में सभी दवाई व टेस्ट भी शामिल हैं। जिला प्रशासन कमेटी बनाने का दावा कर रहा है। कमेटी क्या रही हैं। लोगों से सरेआम लूट हो रही है। बोर्ड पर क्या लिखवाया है इसकी जांच भी करानी चाहिए।
- अंकुर, पीड़िता का भांजा
6 दिन का बिल 1.85 लाख वसूलने की भी शिकायत
हांसी निवासी रमेश खुराना ने अपनी लिखित शिकायत प्रशासन को भेजकर अधिक बिल वसूलने का आरोप लगाया है। रमेश खुराना ने बताया कि उनके पिता सुभाष खुराना को 31 मार्च 2021 को निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था। पांच दिन का बिल 1 लाख 85 हजार रुपये बिल वसूला गया। अब मुझे पता लगा है कि सरकार ने कोविड के मरीजों के लिए बेड के रेट तय किए हैं। इस मामले की जांच कराई जाए। मेरे पिता सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। 9 अप्रैल को उनकी मौत हो चुकी है।
एएसपी से मिले परिजन
इसी अस्पताल पर रेमडेसिविर के दो टीके 21-21 हजार रुपये में ब्लैक करने के आरोप लगे थे। कोरोना संक्रमित महिला मरीज के उपचार के दौरान अस्पताल में गहने गायब हो गए। इस मामले में मृतका के परिजनों ने शुक्रवार को एएसपी उपासना से मुलाकात कर मामला दर्ज करने की मांग की। एएसपी उपासना का कहना है कि शिकायतकर्ता पक्ष की बात सुन ली गई है। जांच में कुछ समय लगेगा। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।