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मशीन तो लगी पर चार साल में एक बार भी नहीं हुई प्रिंटिंग

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गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के प्रिंटिंग विभाग में चार साल पहले रीको कंपनी ने अपनी हाईटेक प्रिंटिंग मशीन लगाई थी, ताकि विद्यार्थी इस अत्याधुनिक मशीन पर प्रैक्टिकल करके इंडस्ट्री के अनुसार तैयार हो सकें और यूनिवर्सिटी का सारा सामान यूनिवर्सिटी में ही प्रिंट हो सके। लेकिन तीन वर्षों से ताले में बंद इस मशीन पर धूल जम चुकी है। 2016 में वर्ल्ड बैंक की ओर से दी गई सीटीपी मशीन पर जमी धूल का आलम तो ये है कि विभाग के चेयरमैन किसी को इस मशीन की फोटो भी नहीं लेने देते। जबकि इस मशीन का इस्तेमाल करके हाई क्वालिटी की प्रिंटिंग की जा सकती है। विभाग की नाकामियों का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि यहां के वरिष्ठ प्रोफेसर ही इन मशीनों में अधिक खर्च और शुरू करने में लंबी प्रक्रिया का हवाला देकर इसे नाकामयाब बता देते हैं। जबकि इंडस्ट्रियलिस्ट कहते हैं कि इन मशीनों पर अगर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को सीखाया जाए और प्रिंटिंग हो तो कम से कम प्रिंटिंग विभाग तो पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन सकता है।
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रीको मशीन
रीको कंपनी है और इसके द्वारा 2015 में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए एक डिजिटल प्रिंट एप्लीकेशन लैब स्थापित की गई थी। इस लैब में 2 डिजिटल प्रिंटिंग मशीन, एक ऑटोमैटिक कटिंग मशीन और एक मॉडम बाइंडिंग मशीन है। इनकी कीमत डेढ़ करोड़ रुपये है और गुजवि के प्रिंटिंग विभाग के अलावा देश के किसी भी प्रिंटिंग इंस्टीट्यूट में यह अत्याधुनिक सेटअप नहीं है। इस रीको लैब में हाई क्वालिटी मल्टी कलर बुक, जर्नल, मैग्जीन, पोस्टर, फोल्डर, ब्रॉशर, कैलेंडर, डायरी, डायरेक्टरी सहित विश्वविद्यालय की सभी तरह की प्रिंटिंग की जा सकती है। इस मशीन के इस्तेमाल से विद्यार्थियों की ट्रेनिंग और रिसर्च को बहुत बेहतर किया जा सकता है। अब रीको कंपनी से बात करके यह मशीन चलाई जा सकती है।
सीटीपी मशीन
दुनिया में कुल प्रिंटिंग की 60 प्रतिशत प्रिंटिंग ऑफसेट मशीन पर होती है। ऑफसेट मशीन पर प्रिंटिंग के लिए प्लेट की जरूरत पड़ती है। यह हाई क्वालिटी प्लेट बनाने के लिए सीटीपी का इस्तेमाल होता है। सीटीपी यानी कंप्यूटर टू प्लेट। यह नए जमाने की मशीन है, जो हाई क्वालिटी की प्लेट कम समय में बनाती है। अन्य मशीनों के साथ यह सीटीपी मशीन गुजवि के प्रिंटिंग विभाग में है। करीब 55 लाख की कीमत वाली यह अत्याधुनिक मशीन 2016 में वर्ल्ड बैंक की तरफ से यूनिवर्सिटी को दी गई थी। वर्तमान में इंडस्ट्री में इसी मशीन और इसके ऑपरेटर्स की भारी मांग है। ऐसे में विद्यार्थी इस मशीन पर प्रेक्टिकल करके एक्सपर्ट बन सकते हैं और आसानी से नौकरी भी पा सकते हैं। यह मशीन भी संभवत देश के किसी भी प्रिंटिंग इंस्टीट्यूट में नहीं है। इसके माध्यम से विश्वविद्यालय की कोई भी पेपर सामग्री हाई क्वालिटी में प्रिंट की जा सकती है।
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इस मशीन पर काम करने वाले विद्यार्थी बनते है एक्सपर्ट : चोपड़ा
ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ मॉस्टर प्रिंटर्स के पूर्व प्रेसिडेंट और दुनिया की प्रिंटिंग की प्रमुख चीन की बीआईजीसी यूनिवर्सिटी में ऑनरेरी प्रोफेसर कमल मोहन चोपड़ा ने बताया कि जब गुजवि में एक कांफ्रेंस हुई थी, मैं भी उसमेें गया था। तब मैंने ही यह मशीन यहां सेटअप करवाई थी, ताकि विद्यार्थियों को एक्सपोजर मिल सके। यह अब बंद है तो इसके दो कारण हैं। पहला, यूनिवर्सिटी ने कभी इस मशीन से सामान प्रिंट नहीं करवाया और दूसरा, विभाग के चेयरमैन बदल गए। मेरी इंडस्ट्री में ही ये 3 मशीनें हैं। ये इतनी अत्याधुनिक और जानदार मशीनेें हैं कि विद्यार्थी इन पर काम करे तो यहां से एक्सपर्ट बनकर ही निकलता है। अगर यूनिवर्सिटी और उसके विभाग के लोगों में विल पावर है तो रीको कंपनी से बातचीत करके ये लैब आज भी चल सकती है। यूनिवर्सिटी इसे चालू करने की प्रोसेस शुरू करती है और इसमें कहीं मेरी जरूरत पड़ती है तो हेल्प के लिए तैयार हूं।
मैंने अधिकारियों को रिपोर्ट बनाने को कहा है। वीरवार को विभागाध्यक्ष से भी बात करूंगा और विद्यार्थियों से भी फीडबैक लिया जाएगा। हमारे पास बेहद आधुनिक मशीनें है और सभी को ऑपरेशन मेें लाएंगे। कोशिश होगी कि यूनिवर्सिटी की 100 फीसदी प्रिंटिंग हमारे प्रिंटिंग विभाग में ही हो और विद्यार्थी इसे करें। इसके लिए रीको में भी बात करेंगे और विद्यार्थियों को दूसरी सभी सुविधाएं भी देंगे।
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प्रो. टंकेश्वर कुमार, कुलपति, गुजवि।
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