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जंग में फंसे जिगर के टुकड़े, खाना नहीं हो रहा नसीब, दो घूंट पानी के सहारे जान बचाने का संघर्ष जारी

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हंगरी बॉर्डर पर 10 घंटे से लाइन में खड़े भारतीय छात्र। चिराग के सौजन्य से। - फोटो : Hisar
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हिसार। रूस-यूक्रेन जंग के बीच फंसे भारतीयों के हालात बमबारी और बर्फबारी से बद से बदतर हो चुके हैं। आरोप है कि यूक्रेन की सीमाओं के साथ लगते बॉर्डर पर पहुंचे भारतीय विद्यार्थियों के साथ यूक्रेन सैनिक बर्बरता बरत रहे हैं। छात्राओं के बाल खींच कर उन्हें घसीटा जा रहा है। भारतीय दूतावास की तरफ से कोई मदद नहीं मिल पा रही। वहीं चार दिन से रोमानिया बॉर्डर पर फंसे 56 विद्यार्थी एयरलिफ्ट नहीं हो पाए हैं। खारकीव में फंसे छात्र सातवें दिन भी वहां से नहीं निकल पाए। सुबह वहां से निकलने का प्रयास किया लेकिन यूक्रेन सैनिकों ने उन्हें वापस बंकरों में भेज दिया। अभिभावकों का कहना है कि जिगर के टुकड़े जंग में फंसे हैं। दो दिन से विद्यार्थियों को खाना तक नसीब नहीं हुआ, वे दो घूंट पानी के सहारे जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
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विभाग ने 110 परिवारों से साधा संपर्क, 1 छात्र का अता-पता नहीं
विभाग की टीम ने बुधवार को यूक्रेन में फंसे जिले के छात्रों के परिवारों से संपर्क किया। गुप्पचर विभाग के डीएसपी अजय शर्मा ने बताया कि उनकी टीमों ने यूक्रेन से लौटे 45 छात्रों के परिजनों से बातचीत की। इसके अलावा यूक्रेन व रोमानिया में फंसे छात्रों व उनके परिजनों से जानकारी जुटाई जा रही है। डीएसपी अशोक शर्मा ने बताया कि अभी तक यूक्रेन में फंसे 111 भारतीय छात्रों की पहचान हो चुकी है। 45 छात्र सुरक्षित अपने घर आ चुके हैं। वहीं, अभी तक 17 छात्र यूक्रेन, 17 छात्र हंगरी, 7 पोलैंड, 21 रोमानिया, 1 स्लोवाकिया, 2 लीविव में हैं। वहीं एक छात्र से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है।
एंबुलेंस पर भी हो रही फायरिंग, तिरंगे ने बचाई जान
आजाद नगर के रहने वाले विकास कांबोज बुधवार को सकुशल घर पहुंच गए हैं। उसने बताया कि 24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन पर बमबारी शुरू कर दी थी। चारों तरफ दहशत और फाइटर जेट की आवाजें सुनाई दे रही थी। जब सायरन बजता तो सभी विद्यार्थी हॉस्टल के बंकर में दुबक जाते। हर कोई मदद के लिए यूक्रेन में भारतीय दूतावास से संपर्क कर रहा था लेकिन वहां से किसी प्रकार की मदद नहीं मिली। 25 फरवरी को हिम्मत कर हमने निजी बस का इंतजाम किया। उसमें सवार होकर रोमानिया बॉर्डर तक पहुंचे। रास्ते में सैनिक एंबुलेंस पर भी फायरिंग कर रहे थे। बस पर तिरंगा झंडा लगाया हुआ था जिस कारण रास्तेे में किसी ने नहीं रोका। जिन वाहनों पर भारतीय तिरंगा नहीं लगा हुआ था उन्हें रोका जा रहा था। कुछ को वापस भेज दिया गया।
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घर वापसी के लिए बमबारी से बचकर निकले तो बर्फबारी में 40 घंटे भूखे प्यासे लगे हैं कतारों में
विकास ने बताया कि दहशत के माहौल में हम गोलियों और बमबारी के धमाकों की आवाजों के बीच 26 तारीख को रोमानियां बॉर्डर पर पहुंचे। यहां का माहौल कुछ अलग की था। चारों तरफ भारतीय और अन्य लोग लाइनों में खड़े थे। यह देख हम हैरान हो गए की यहां तो नंबर नहीं आएगा। उसके बाद हम लाइन में लग गए। घर वापसी के लिए बमबारी से बचकर निकले तो भारी बर्फबारी में करीब 40 घंटे भूखे-प्यासे कतारों में लगे रहे। जो लाइन से हटता करीब चार घंटे पीछे चला जाता। आरोप है कि इस दौरान यूक्रेन के सैनिक छात्राओं के बाल खींच कर उन्हें पीछे कर रहे थे। मारपीट की गई। आखिर हर मुसीबत झेल कर बॉर्डर पार किया। रोमानिया की सरकार और वहां के दूूतावास ने मदद की। वहां के लोगों ने हमें फोन सिम खरीद कर दिए। खाने पीने की पूरी व्यवस्था थी। वहां पर कोई परेशानी नहीं हुई। फिर एक मार्च दोपहर बाद वहां से भारत आने के लिए हवाई जहाज में सवार हुए। रात करीब 12 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे। सुबह दिल्ली से चले और 11 बजे हिसार के डाबड़ा चौक पहुंचा। मां महिंद्र कौर और भाई सागर मुझे घर लेकर आए। पिता कश्मीर कांबोज पुलिस विभाग में हैड कांस्टेबल है और उस समय वे ड्यूटी पर अंबाला में मौजूद हैं।
चार दिन से मदद के लिए तरस रहे 56 विद्यार्थी
यूक्रेन के ओडेसा शहर से घर वापसी के लिए 56 विद्यार्थी रोमानिया के बालोटेस्टी जगह पर फंसे हैं। यहां पर फंसे हिसार निवासी अमरजीत ने बताया कि बमबारी और गोलियों के बीच जैसे-तैसे कर रोमानिया पहुंचे। यहां पर चार दिन से घर वापसी का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय दूतावास से लगातार संपर्क कर रहे हैं लेकिन वहां से किसी प्रकार की कोई मदद नहीं मिल रही। मौत के मुंह से निकलकर यहां तक पहुंचे और अब चार दिन से यहां पर फंसे हुए है। दूतावास वाले कह रहे हैं आज भेज देंगे लेकिन चार दिन गुजर जाने के बाद भी यहीं बोल रहे हैं। यहां पर कई बार इंटरनेट भी नहीं चल रहा, जिस कारण घरवालों से भी बात नहीं हो पाई।
खारकीव छोड़ने की एडवाइजरी जारी, ट्रेन में घुसने नहीं दे रहे, कैसे जाएं
हिसार। यूक्रेन के खारकीव में फंसे विद्यार्थियों का बुरा हाल है। हिसार के अंशुमन ने बताया कि सुबह बंकर से निकल कर रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। यहां पहुंचने के बाद यूूक्रेन के सैनिकों ने ट्रेन के अंदर नहीं घुसने दिया। दिनभर में कई ट्रेन यहां से गुजरी लेकिन भारतीय को ट्रेन में चढ़ने तक नहीं दिया जा रहा है। दूतावास से बार-बार मदद मांगी जा रही है लेकिन, कोई मदद नहीं मिल रही। जान बचाकर यहां तक पहुंचे हैं अब कहां जाएं। यू्क्रेन सरकार की ओर से जल्द खारकीय शहर खाली करने की एडवाइजरी जारी की गई है। डर का माहौल बना हुआ है। दो दिन से भूखे प्यासे हैं।
सुरक्षित घर वापस आया बोबुआ का सोनू चहल
बरवाला तहसील के बोबुआ गांव निवासी सोनू चहल बुधवार को सुरक्षित घर लौट आया। सोनू ने बताया कि खारकीव व कीव की तरह इवानो में शहर में ज्यादा बमबारी नहीं हुई। लेकिन फिर भी रूस की सेना पहुंचने व हमला होने का डर से सहमे रहे। हालातों को समझते हुए वे रोमानिया बॉर्डर पर पहुंच गए। एक दिन इंतजार के बाद रोमानिया में प्रवेश किया। सोनू व उसके ग्रुप के सदस्य भारतीय एंबेंसी के पास पहुंचे। इसके बाद भारतीय एंबेंसी ने उनका टिकट बुक कराया। मंगलवार शाम 3 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे। सोनू बुधवार शाम 6 बजे अपने गांव बोबुआ में पहुंचा तो परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए।
सालिका व आयुषी का टिकट नहीं हुआ कंफर्म
नलवा गांव की बेटी सालिका सहरावत व डाबड़ा गांव की आयुषी मोहिल का अभी तक टिकट कंफर्म नहीं हुआ है। दोनों अन्य भारतीयों के साथ रविवार को यूक्रेन बॉर्डर पार करके रोमानिया देश में पहुंच गई थी। फिलहाल ये दोनों छात्राएं रोमानिया में भारतीय एंबेंसी के शेल्टर होम में ठहरी हैं। सालिका के भाई विकास सहरावत ने बताया कि मौत के साय में 5 दिन रहकर सालिका व उसकी सहेलियां एक बस में सवार रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचीं। बस चालक ने बॉर्डर से 6 किलोमीटर दूर उतार दिया था।
माता-पिता और देशवासियों की दुआओं ने बचा लिया : पीयूष
हांसी। यूक्रन में फंसे मॉडल टाउन निवासी पीयूष टुटेजा बुधवार को ऑपरेशन गंगा की मदद से सकुशल घर पहुंच गया। छात्र ने कहा कि माता-पिता और देशवासियों की दुआ से वह जंग से बच कर आया है। बीते दिनों को याद करता हूं तो दहशत के मारे रूह कांप जाती है।
मंगलवार को डॉ. लवकेश टुटेजा अपने बेटे को लेने के लिए दिल्ली पहुंचे और बुधवार को घर आए। इस दौरान परिजन भावुक हो गए। पीयूष यूक्रेन के इवानो शहर की नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में मेडिकल का छात्र है। पीयूष ने बताया कि यूक्रेन के लोगों को उनसे पहले एंट्री दी जा रही थी। 1 घंटे में एक छात्र को बार्डर क्रॉस करवाया जा रहा था। वहां पर करीब 5 से 6 हजार छात्र फंसे हैं। पीयूष ने बताया कि बमबारी के बीच सारा सामान छोड़ सिर्फ पासपोर्ट लेकर निकाला। संवाद
यूक्त्रस्ेन में फंसे बास के छात्रों के परिजनों का दर्द
बास। क्षेत्र के कुछ छात्र कीव से निकलकर यूक्रेन से सटे हंगरी बार्डर पर फंसे हैं। बर्फबारी के बीच भूख-प्यास से उनका हाल बेहाल है। पिछले दो दिनों से उनसे परिजनों की बात भी नहीं हो पा रही है जिससे परिजनों की चिंता और अधिक बढ़ गई है। छात्रों को वहां पर खाना तक नहीं मिल रहा है सिर्फ बिस्किट और पानी के सहारे अपना पेट भरने को मजबूर हैं। माइनस तापमान और दहशत के माहौल में छात्र बंकरों और रेस्क्यू सेंटर्स में जमीन पर सोने को मजबूर हैं। बास की स्वीटी, साहिल, श्रीकांत, हितेश व अमित शर्मा पढ़ाई करने के लिए पिछले वर्ष यूक्त्रस्ेन की राजधानी कीव गए थे। इन के सपनों को पूरा करने के लिए परिजनों ने कर्ज उठाकर इनको विदेश भेजने का काम किया था। अब उन्हें अपने बच्चों के भविष्य की चिंता है। संवाद
विद्यार्थियों का परिजन बेसब्री से कर रहे इंतजार
सिवानी मंडी। रूस व यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में फंसे भारतीय छात्रों का अपने घर लौटने का इंतजार लंबा होता जा रहा है। हालांकि हजारों की संख्या में यूक्रेन से विद्यार्थी भारत लौटे हैं और सरकार द्वारा उनको लाने के इंतजाम भी किए जा रहे हैं। स्लोवाकिया से रिजुल शर्मा ने बताया कि पिछले कई दिन डर और भय के माहौल में बिताने के बाद आखिरकार आज राहत की सांस ली है। भारतीय दूतावास की तरफ से घर वापसी के लिए किए गए प्रयासों से वह यूक्रेन को छोड़कर स्लोवाकिया पहुंच गए हैं। उन्हें इस देश का वीजा दिया गया है। जल्द ही उन्हें भारत भेजने की कार्रवाई की जाएगी। वहीं रिजुल शर्मा के परिजन उसके घर लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उनकी नानी शकुंतला सारस्वत, मां व मामा अनिल कुमार ने सरकार से सभी भारतीय विद्यार्थियों को सकुशल देश लाने की गुहार लगाई है। संवाद

बेटे पीयूष को दुलार करतीं ज्योति टुटेजा।- फोटो : Hisar

यूक्रेन से घर लौटने के बाद बेटे विकास को गले लगाती मां महिंद्र कौर।- फोटो : Hisar

तिरंगे के साथ चार दिन से रोमानिया में फंसे भारतीय छात्र। - फोटो : Hisar

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